बॉलीवुड में 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक हैं। हिंदी फिल्मों में न केवल उन्होंने दमदार रोल से दर्शकों के दिलों को जीता है बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में उनके अभिनय की जमकर तरीफे भी हुई है।
शबाना की अदाकारी को लोग हमेशा याद रखते हैं। शबाना आजमी भी उन्ही में से एक हैं। शबाना फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं। ‘पद्मभूषण’ सहित कई अवार्ड से सम्मानित की जा चुकी शबाना आजमी का फिल्म इंडस्ट्री में काफी अच्छा योगदान रहा हैं।
बता दें उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत साल 1974 में फिल्म अंकुर से की थी इसके बाद उन्होंने फिल्मों में अलग-अलग कई सारे रोल किए हैं। वहीं बड़े पर्दे पर शबाना आजमी के हर एक किरदार को सिनेप्रेमियों ने पसंद किया है। तो चलिए आज हम आपको बताने वाले हैं शबाना के द्वारा निभाए गए कुछ अलग और दिलचस्प किरदारों के बारे में ।
‘मंडी’ में वैश्या के किरदार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार
शबाना आजमी की यह फिल्म साल 1984 में आई थी। इस फिल्म में उन्होंने एक वैश्या का किरदार निभाया था। उनकी यह फिल्म सुपरहिट रही थी। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है। इस फिल्म का निर्देशन श्याम बेंगल ने किया था।
‘शतरंज के खिलाड़ी’ से मिली अलग पहचान
इस फिल्म में शबाना आजनी पहली बार एकदम अलग अंदाज में नजर आई थी। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार की पत्नी का किरदार किया था। इस फिल्म से शबाना आजमी को अलग पहचान मिली। यह फिल्म साल 1977 में रिलीज हुई थी।
समलैंगिकता पर बनी ‘फायर’ में ऐतिहासिक रोल
बॉलीवुड में समलैंगिकता पर बनी ये पहली फिल्म जो साल 1996 में आई थी। शबाना आजमी के साथ इस फिल्म में नंदिता दास मुख्य भूमिका में थी इस फिल्म को दीपा मेहता ने डायरेक्ट किया था।
‘मकड़ी’ की चुड़ैल
फिल्म मकड़ी साल 2002 में रिलीज हुई थी शबाना आजमी की इस फिल्म में उन्होंने डकैत का रोल प्ले किया था। जो गांव वालों को चुडैल बनकर डराती है। इस फिल्म का निर्देशन विशाल ने किया था।
‘जज्बा’ में किडनैपर
फिल्म जज्बा साल 2015 में आई थी शबाना के साथ इस फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन और इरफान खान भी अहम रोल में थे। शबाना आजमी ऐसी मां का किरदार करती हैं जो अपने बेटे की मौत का बदला लेने के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी का अपहरण कर लेती है।
शबाना आज़मी जब ट्रेन के आगे कूदी थी तो…
शबाना की जिंदगी का एक किस्सा यह भी हैं की स्कूल के दिनों में उन्होंने दो बार आत्म हत्या करने की कोशिश भी की थी। पहली बार उन्होंने अपनी विज्ञान लैब में रखा कॉपर सल्फेट खा लिया था और दूसरी बार उन्होंने ट्रेन के सामने कूद आत्महत्या करना चाही थी।


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