Chaos in Share Market : सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार को बाजार बंद होते-होते निवेशकों की दौलत में भारी गिरावट दर्ज हुई और शेयर मार्केट पर मायूसी छा गई। दिन के अंत में BSE Sensex 1470.50 अंक यानी करीब 1.93% गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 488.05 अंक (2.06%) फिसलकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। बाजार में यह गिरावट इतनी व्यापक रही कि लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
दिनभर की गिरावट
कारोबार के दौरान बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन आखिरी घंटों में बिकवाली और तेज हो गई। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट पिछले कई महीनों की सबसे खराब साप्ताहिक परफॉर्मेंस में से एक मानी जा रही है। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स भी दबाव में रहे।
गिरावट के पीछे ये बड़े कारण
1. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। दक्षिण एशिया के देशों पर इसका असर हो रहा है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें उछल गईं और Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
Foreign Institutional Investors (FIIs) ने लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाला, जिससे लार्ज-कैप और ब्लू-चिप शेयरों में भारी दबाव बना। बीते समय में Foreign Institutional Investors ने बाजार से काफी पैसा निकाला है जिसके बाद बाजार की कमर भी टूटी है।
3. रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले Indian Rupee लगभग 92.37 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार अपेक्षाकृत महंगा हो गया है।
4. महंगाई बढ़ने की आशंका
ईरान युद्ध के चलते ईंधन के आयात पर असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे ब्याज दरों को लेकर वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर असर पड़ सकता है।
शुक्रवार के कारोबार में ऑटो, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। निवेशकों में डर का माहौल इतना गहरा रहा कि हर छोटी तेजी पर भी मुनाफावसूली शुरू हो गई।
अब बाजार की नजर 23,000 के स्तर पर
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अब अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। आने वाले हफ्ते में बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी नीतियों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।
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