श्रीनगर/मुंबई, 28 जनवरी (आईएएनएस)। कश्मीर के हैंडीक्राफ्ट और कालीन उद्योग के लिए यूरोप सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में भारत-ईयू एफटीए से कश्मीर के हैंडीक्राफ्ट और कालीन उद्योग के लिए निर्यात के अवसर बढ़ेंगे। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से बुधवार को दी गई।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद में प्रशासन समिति के सदस्य शेख आशिक ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) होना काफी सकारात्मक है। कश्मीर के हैंडीक्राफ्ट और कालीन उद्योग के लिए यूरोप सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में इस समझौते से कश्मीर के निर्यातकों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
टेक्सटाइल कंपनी अलोक इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनिल राजवंशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से भारत-ईयू एफटीए पर बातचीत करते हुए कहा कि यह देश के लिए काफी अच्छा समझौता है। इससे लेदर, कपड़ा और अधिक श्रम उपयोग वाली इंडस्ट्री को यूरोप में निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 27 देशों के बाजारों तक सीधी पहुंच प्राप्त होती है और इन देशों में 20 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा से बाजार हैं। इस कारण भारत-ईयू समझौते को मदर ऑफ ऑल डील कहा गया है।
राजवंशी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में इतने द्विपक्षीय समझौते हुए हैं, जितने इससे पहले के 40 वर्षों में नहीं हुए थे। मुझे उम्मीद है कि भारत आने वाले समय में अमेरिका के साथ भी इस तरह से समझौते करेगा।
इससे पहले समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए पॉलीमेडिक्योर के एमडी और सीईओ हिंमाशु वैध ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होना देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इससे एक साथ यूरोप के 27 देशों के बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए खुल गए हैं। साथ ही, भारत को यूरोपीय बाजारों में वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
–आईएएनएस
एबीएस/
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