Jayant Mundhra on Rupee and Dollar: Entrepreneur और बिज न्यूज+ के संस्थापक जयंत मुंद्रा ने भारत की आर्थिक स्थिति और रुपये की गिरती ताकत को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि भारत ने जल्द ही आयात और विदेशी तकनीक पर अपनी निर्भरता कम नहीं की, तो आने वाले समय में भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (Dollar vs Rupee) 150 रुपये (Rupee at 150 ) तक पहुंच सकता है। राज शमानी के साथ एक पॉडकास्ट (jayant Mundhra on Raj Shamani Podcast) बातचीत में जयंत मुंद्रा ने कहा कि भारत धीरे-धीरे एक “कंज्यूमर इकॉनमी” यानी केवल उपभोक्ता अर्थव्यवस्था बनता जा रहा है।
उनका कहना है कि देश में लोग विदेशी कंपनियों के उत्पाद और सेवाएं तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर नई तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में विदेशों से सामान, तकनीक, ऊर्जा और डिजिटल सेवाएं खरीद रहा है। इससे हर साल भारी मात्रा में डॉलर देश से बाहर जा रहे हैं, जिसका असर सीधे भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक खर्चों में कटौती करना कोई स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना था, “यह अब कोविड का समय नहीं है और न ही पांच साल पहले वाला भारत है, जब लोग बिना सवाल किए थालियां बजा रहे थे। अब लोग हर बात पर सवाल उठाने लगे हैं।”
Jayant Mundhra on Rupee and Dollar: रुपये पर बढ़ रहा दबाव

मुंद्रा के अनुसार, जब किसी देश को लगातार आयात के लिए डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, तो उसकी अपनी मुद्रा कमजोर होने लगती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल खर्च कम करने या बचत करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब देश के लोग पहले की तरह चुप नहीं रहते, बल्कि आर्थिक नीतियों पर सवाल पूछ रहे हैं। जयंत मुंद्रा ने भारत की ऊर्जा जरूरतों पर भी चिंता जाहिर की।
उन्होंने बताया कि भारत की तेल और गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों के आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, यह निर्भरता पहले लगभग 83 प्रतिशत थी, जो अब करीब 89 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह 95 प्रतिशत तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि इतनी अधिक विदेशी निर्भरता किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है।
विदेशी तकनीक पर सवाल

मुंद्रा ने यह भी कहा कि भारत में विदेशी टेक कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स को तेजी से अपनाया जा रहा है, जबकि देश को अपने खुद के विकल्प तैयार करने चाहिए। उन्होंने सैटेलाइट इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय लोग विदेशी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अरबों डॉलर विदेश जा रहे हैं। उनका मानना है कि भारत को केवल विदेशी तकनीक का ग्राहक बनने के बजाय खुद नई तकनीक विकसित करनी चाहिए।
चीन और वियतनाम से सीखने की जरूरत
उन्होंने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने पहले अपने घरेलू उद्योग और विनिर्माण क्षमता को मजबूत किया, उसके बाद वे निर्यात में बड़ी ताकत बने। मुंद्रा ने गुजरात और तमिलनाडु जैसे भारतीय राज्यों की तारीफ करते हुए कहा कि इन राज्यों ने सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से काम किया है, जो देश के लिए अच्छा संकेत है।
बातचीत के अंत में जयंत मुंद्रा ने कहा कि यदि भारत को भविष्य में मजबूत अर्थव्यवस्था बनना है और रुपये को स्थिर रखना है, तो देश को खनन, उत्पादन, तकनीक और रिसर्च में बड़े स्तर पर निवेश करना होगा। उनका मानना है कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेज कदम उठाना अब समय की जरूरत बन चुकी है।
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