Petrol-Diesel Price Hike Update: देश में गैस सिलेंडर के दाम में इजाफा होने के बाद आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सालों से स्थिर चल रही ईंधन की कीमतें अब बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों का बजट प्रभावित होना तय माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और शांति वार्ता का ठप होना बताया जा रहा है। इसके चलते वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पिछले चार साल का सबसे ऊंचा स्तर है। खास तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ क्षेत्र पर दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है।
Petrol-Diesel Price Hike Update: भारत में क्यों बढ़ सकते हैं दाम

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं। पिछले करीब चार सालों से इन कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अब कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल पर करीब 20 रुपए और डीजल पर लगभग 100 रुपए प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा है। इसके अलावा, पिछले साल कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 110 डॉलर से ऊपर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देश पर पड़ता है।
India Oil Prices: पहले भी बढ़ोतरी के संकेत
कुछ समय पहले यह अनुमान लगाया गया था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, उस समय सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया था। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए कीमतों में बदलाव की संभावना फिर से बढ़ गई है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) समेत अन्य तेल कंपनियों ने हाल ही में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा गया है। लेकिन लगातार बढ़ते खर्च के कारण यह स्थिति लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने एक्स पोस्ट में क्या कहा?
इस दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ”पिछले 4 वर्षों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे। बीते 60 दिनों में सैन्य तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने जैसी परिस्थितियों से कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ी, फिर भी देश में ईंधन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
इस दौरान दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े। कहीं-कहीं तो ईंधन की कमी के कारण लिमिट तय करनी पड़ी और लंबी-लंबी कतारें भी देखने को मिलीं। वहीं, PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने घबराहट की बजाय संतुलित नीति अपनाई। देश में ईंधन की सप्लाई लगातार बनी रही और आम लोगों पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा”
बीते 4 वर्ष: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े।
बीते 60 दिन: Military conflict व Strait of Hormuz के बंद होने के कारण कच्चे तेल के आयात की लागत तेज़ी से बढ़ी, फिर भी देश में ईंधन के दाम नहीं बढ़े।
जबकि इसी अवधि में… pic.twitter.com/JlczGAtTqL
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) May 1, 2026
LPG Price Increase: एलपीजी और अन्य ईंधन भी महंगे

मई महीने की शुरुआत में ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, इंडस्ट्रियल डीजल और जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ईंधन महंगाई का असर धीरे-धीरे आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। दिल्ली में इस समय पेट्रोल की कीमत करीब 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपए प्रति लीटर है।
लेकिन आने वाले दिनों में इन कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने की लागत पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई और बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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