RBI New Rule: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बैंकों के कैपिटल बाजार में प्रवेश संबंधी नए नियम उधारदाताओं को कॉरपोरेट अधिग्रहण, विलय और अधिग्रहण और लीवरेज्ड बायआउट में सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति देंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि नया ढांचा बैंकों के जोखिमों को नियंत्रण में रखते हुए अधिग्रहण सौदों के लिए धन जुटाने की अनुमति देगा। साथ ही अधिग्रहण के बाद लोन-से-इक्विटी (D/E) Ratio पर सीमा निर्धारित करके और पूंजी बाजार में निवेश (सीएमई) को सीमित करके, केवल आर्थिक रूप से स्थिर कंपनियां ही बैंक से वित्तपोषण प्राप्त कर सकेंगी।
RBI New Rule

इससे जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी, जिसका अर्थ है बैंकिंग प्रणाली में वित्तीय अस्थिरता की संभावना को कम करना। नए नियम बैंकों को कॉरपोरेट अधिग्रहण, विलय और अधिग्रहण, लीवरेज बायआउट में एक्टिव रूप से भाग लेने की अनुमति देंगे। साथ ही, व्यक्तियों के लिए प्रतिभूतियों के बदले ऋण की बढ़ी हुई सीमा से अधिक तरलता प्रदान होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, ये नियम कंपनियों को अधिग्रहण के लिए धन प्राप्त करने में मदद करेंगे और बाजार में धन के प्रवाह को भी बढ़ाएंगे।
Capital Market Exposure
RBI ने 13 फरवरी, 2026 को ये नए निर्देश जारी किए। ये नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे लेकिन बैंक इन्हें पहले अपना लेते हैं तो उससे पहले भी लागू हो सकते हैं। एक प्रमुख बदलाव यह है कि अब बैंक एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी के अधिग्रहण की लागत का 75 प्रतिशत तक वित्तपोषण कर सकते हैं। लेकिन केवल मजबूत और आर्थिक रूप से स्थिर कंपनियां ही इसके लिए पात्र होंगी।
RBI New Guidelines

आरबीआई ने बैंकों को शेयरों, म्यूचुअल फंड, ईटीएफ, आरईटी और इनविटेशनल इन्वेस्टमेंट (आईएनवी आईटी) जैसे निवेशों के बदले व्यक्तियों को अधिक लोन देने की अनुमति भी दी है। ये निवेश लोन के लिए सुरक्षा के रूप में कार्य करते हैं। व्यक्तियों के लिए अधिकतम लोन सीमा 10 मिलियन रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से 25 लाख रुपये तक शेयर बाजार से शेयर खरीदने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।
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