Rupee All Time Low Today: भारतीय रुपया लगातार दबाव में नजर आ रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (Rupee vs Dollar) रुपया पहली बार 96 के स्तर को पार करते हुए 96.14 तक गिर गया। बुधवार को ही रुपये में करीब 50 पैसे की बड़ी कमजोरी देखने को मिली थी। इससे एक दिन पहले रुपया 95.64 के स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच एक्सपर्ट का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में डॉलर 100 रुपये तक भी पहुंच सकता है। रुपये की गिरावट सिर्फ विदेशी बाजार का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।
इस साल की शुरुआत से ही भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। दिसंबर 2025 में रुपया पहली बार 90 के स्तर से नीचे गया था और उसके बाद से गिरावट लगातार जारी है। बाजार के जानकार मानते हैं कि वैश्विक आर्थिक हालात और विदेशी निवेशकों की चिंता के कारण भारतीय मुद्रा कमजोर हो रही है। डॉलर मजबूत होने से एशियाई देशों की करेंसी पर भी असर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
Rupee All Time Low Reason: मिडिल ईस्ट तनाव बना बड़ी वजह

रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ रहे विवाद ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह रास्ता दुनिया में तेल सप्लाई का बड़ा केंद्र माना जाता है।
युद्ध जैसे हालात बनने पर निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं और फिलहाल अमेरिकी डॉलर सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है। इसी वजह से डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। डॉलर इंडेक्स भी मजबूत होकर 99 के ऊपर पहुंच गया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो भारतीय रुपये जैसी एशियाई मुद्राएं कमजोर होने लगती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
- भारत अपनी जरूरत का अधिकतर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
- देश की लगभग 85 फीसदी तेल जरूरत आयात पर निर्भर है।
- इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।
- तेल महंगा होने का मतलब है कि भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे।
- ओपेक देशों का उत्पादन भी कम हुआ है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
- तेल कंपनियों का कहना है कि अगर होर्मुज रूट में दिक्कत जारी रहती है तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
- बड़े निवेश बैंकों का अनुमान है कि अगले साल तक भी तेल 100 डॉलर के आसपास बना रह सकता है।
- इसका असर भारत के आयात बिल और रुपये दोनों पर पड़ेगा।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
- भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
- बुधवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 4,700 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
- जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये की कीमत कमजोर हो जाती है।
- देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी इसका असर पड़ता है।
- बाजार में डॉलर की कमी होने पर रुपया और नीचे जाने लगता है।
- यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में भारतीय मुद्रा लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है।
1 Dollar Equals to 96 Rupee: आम आदमी पर कैसे पड़ेगा असर?

- रुपये की गिरावट का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।
- डॉलर महंगा होने से विदेशों से आने वाला हर सामान महंगा हो जाता है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है क्योंकि भारत तेल आयात करता है।
- इसके अलावा मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक सामान, प्लास्टिक उत्पाद और रसोई गैस जैसी चीजें भी महंगी हो सकती हैं।
- महंगाई बढ़ने से लोगों के घर का बजट बिगड़ सकता है।
- विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को फीस और खर्च के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
- वहीं विदेश घूमने की योजना बना रहे लोगों का बजट भी बढ़ सकता है।
Rupee All Time Low Today: सरकार ने उठाए ये कदम
बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक खर्च कम करें और आर्थिक अनुशासन बनाए रखें। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। इसके अलावा सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर टैक्स बढ़ाने का फैसला भी लिया है ताकि डॉलर की ज्यादा निकासी को रोका जा सके। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल रुपये पर दबाव बना रह सकता है और आने वाले दिनों में इसमें और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
आर्थिक एक्सपर्ट का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो रुपये (Rupee Crash) पर दबाव जारी रहेगा। वहीं अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो डॉलर की कीमत और बढ़ सकती है। हालांकि अगर वैश्विक हालात सामान्य होते हैं, तेल की कीमतें कम होती हैं और विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाते हैं, तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल देश की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई है।
यह भी पढ़ें:


Download Android App
Download iOS App




