भारतीय शेयर बाजार में दो दिनों से लगातार तेजी जारी है और आज भी हफ्ते के लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला। सेंसेक्स 595.87 अंक, 0.78 प्रतिशत उछलकर 76,288.65 पर खुला। वहीं निफ्टी 50 अपने 141.45 अंक, 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,582.25 पर खुला। खबर लिखते समय तक सेंसेक्स में 800 से अधिक अंको का उछाल देखने को मिला है वहीं निफ्टी में भी 200 से अधिक अंको का उछाल देखने को मिला है।
बाजार में 1 प्रतिशत तक की तेजी
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के मजबूत दूसरी तिमाही नतीजों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
Finance शेयरों में खरीदारी
सेक्टोरल आधार पर finance शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स-बैंक इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ गया। इसके अलावा केमिकल, एफएमसीजी और मीडिया शेयरों में भी मजबूती रही और इनके सूचकांक 0.77 प्रतिशत तक बढ़े। प्राइवेट बैंक, सीमेंट, IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। दूसरी ओर हेल्थकेयर और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे इन सेक्टरों पर कुछ दबाव बना रहा।
बाजार में कैसे आई तेजी?
शेयर बाजार में लगातार दो दिनों से तेजी के बाद बाजार एक्सपर्ट का कहना है कि तेजी का एक बड़ा कारण वैल्यू बायिंग और शॉर्ट कवरिंग है। जिसमें बड़े लार्जकैप शेयरों में निवेशकों ने गिरावट के दौरान खरीदारी की थी, जिसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि समय के साथ की गई वैल्यू बायिंग निवेशकों को बेहतर रिटर्न दे सकती है। वहीं कई मजबूत लार्जकैप शेयरों में निवेशकों ने एफआईआई बिकवाली जारी रहने की उम्मीद पर शॉर्ट पोजीशन बनाई थीं, लेकिन परिस्थितियां बदलने के साथ अब इन पोजीशनों को कवर किया जा रहा है, जिससे बाजार को समर्थन मिल रहा है।
FII में खरीददारी से मिला फायदा
शेयर बाजार में तेजी के साथ सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार दूसरे सत्र खरीदारी जारी रखते हुए 3,114 करोड़ रुपए की शुद्ध इक्विटी खरीद की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार दूसरे दिन शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 392 करोड़ रुपए की बिकवाली की। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों और उनके वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभाव पर भी बनी रहेगी, क्योंकि इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।


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