Rouse Avenue Court : राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट द्वारा कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मामले में तीन आरोपियों को जमानत मिल गई है। सीबीआई के अनुसार यह मामला एक लंबित सीबीआई जांच को रिश्वत देकर प्रभावित करने की कथित साजिश से जुड़ा हुआ है। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि इस काम के लिए तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी, जिसमें से एक करोड़ रुपए हवाला के जरिए दिए गए।
सीबीआई द्वारा इस मामले में आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक कर्मचारी प्रदीप और एक अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई का कहना है कि आरोपियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लंबित सीबीआई मामले में अनुकूल परिणाम दिलाने का भरोसा दिया और कथित रिश्वत की रकम के लेन-देन तथा सुपुर्दगी में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत व क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार को कोर्ट ने एक अगस्त को ही जमानत दे दी थी।
फोन उपलब्ध न कराना जांच में असहयोग नहीं: बचाव पक्ष
आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई ने दलील दी कि एक आरोपी ने अपना मोबाइल फोन छिपा दिया है और जांच के दौरान उसे बरामद नहीं कराया। वहीं, सीबीआई की दलील को खारिज करते हुए बचाव पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप राणा, अधिवक्ता भरत गुप्ता और अधिवक्ता विभोर चौधरी ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसलों का हवाला दिया और कहा कि मोबाइल फोन उपलब्ध न कराना, अपने-आप में जांच में असहयोग नहीं माना जा सकता।
अधिवक्ता प्रदीप राणा यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने ही खिलाफ सबूत देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत मिले अधिकारों के खिलाफ है। अधिवक्ता प्रदीप राणा ने दलील दी कि जिस कथित बैठक को पूरे मामले का आधार बताया गया है, उसमें वास्तव में क्या हुआ, इसका कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आया है। अधिवक्ता प्रदीप राणा ने आगे कहा कि कहा कि आईपीएस अधिकारी और क्राइम ब्रांच के अधिकारी से जुड़े जिन बैंक लेन-देन का उल्लेख किया गया है, वे पूरी तरह वैध बैंक ट्रांसफर थे, न कि किसी प्रकार की अवैध रिश्वत।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी दस्तावेज उचित समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की जांच में सीबीआई का कोई भी अधिकारी कथित साजिश या किसी कथित अवैध लेन-देन में शामिल नहीं पाया गया है।
आरोपी को हिरासत में रखने की जरुरत नहीं: कोर्ट
अधिवक्ता प्रदीप राणा की ओर से पेश की गई दलीलों को सुनने के बाद विशेष सीबीआई कोर्ट ने आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। आरोपियों को जमानत देते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और आरोपी से हिरासत में और पूछताछ की जरूरत नहीं है। ऐसे में उसे और समय तक हिरासत में रखने से जांच में कोई मदद नहीं मिलेगी।
इसके अलावा, चार्ज-शीट दाखिल होने के बाद भी, मुकदमे को पूरा होने में काफी समय लगने की संभावना है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यह भी ध्यान देना जरूरी है कि आरोपी पर लगाए गए किसी भी अपराध के लिए सात साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान नहीं है। ऐसे में आरोपी जमानत का हकदार है। ये सारा मामला पांडेचेरी में दवा कंपनी पर चल रहे सीबीआई केस में आईपीएस ऑफिसर द्वारा किसी सीबीआई ऑफिसर को रिश्वत देने का था परंतु सीबीआई अपने किसी ऐसे अधिकारी को नामजद नहीं कर पायी जिसको रिश्वत दी गई हो।



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