नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने आप पार्टी के विधायक कपिल मिश्रा की दिल्ली विधानसभा सदस्यता रद्द करने के स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को 4 सितंबर तक के लिए टाल दी है। जस्टिस विभू बाखरू ने कपिल मिश्रा को अपने आरोपों को लेकर हलफनामा दाखिल करने का निर्देेश देते हुए इस सुनवाई को टाला है। मिश्रा को हलफनामा दाखिल करने का दो सप्ताह का समय दिया गया है।
कपिल मिश्रा ने जस्टिस विभू बाखरू की बेंच के आगे कहा कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष महोदय ने लॉ ऑफ नेचुरल जस्टिस के खिलाफ जाकर निर्णय सुनाया। कपिल मिश्रा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और गाइडलाइंस का उल्लंघन किया और विधानसभा अध्यक्ष ने सुनवाई का मौका नहीं दिया। यहां तक कि क्रॉस एग्जामिनेशन और गवाह को तथ्य रखने का मौका भी नहीं दिया।
मिश्रा के वकील ने कहा कि 27 जनवरी को जिस तारीख से स्पीकर ने सदस्यता रद्द करने का निर्णय दिया, उसके बाद दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र भी हुआ था जिसमें कपिल मिश्रा ने विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा भी लिया। सदन में सरकार को गिराने और व्हिप का उल्लंघन करने की कोई नीयत नहीं दिखाई गई।
इसलिए विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को रद्द कर दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए स्पीकर के वकील सुधीर नंदन ने कहा कि कपिल मिश्रा के आरोप गलत हैं। उन्हें नोटिस दिया था और साथ ही कई मौके दिए। लेकिन उनका कोई उत्तर नहीं मिला।


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