South West District News : साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रिटायर्ड भारतीय सेना के कर्नल से 15.50 लाख रुपये ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि पंजाब और राजस्थान में बैठे आरोपी साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और इन खातों के जरिए ठगी की रकम को आगे पहुंचाया जाता था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान लुधियाना निवासी सरबजीत (38), सूरज (30), संदीप (32) और सीकर, राजस्थान निवासी नरेश उर्फ लकी के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चार मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
डीसीपी अमित गोयल के मार्गदर्शन में एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल की देखरेख में एसीपी ऑपरेशन संदीप और एसएचओ प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई सोमबीर, एचसी जितेंद्र, एचसी पुनीत, एचसी मयूरपाल और एचसी संदीप की टीम ने आरोपियों को पकड़ा है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का नेटवर्क कंबोडिया और यूएई/दुबई में सक्रिय साइबर ठगी करने वाले ऑपरेटरों से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान जिस बैंक खाते में रिटायर्ड कर्नल से ठगी की रकम पहुंची, वह एनसीआरपी पर दर्ज 17 शिकायतों से जुड़ा मिला।
इन शिकायतों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पीड़ित मुनिरका एन्क्लेव निवासी रिटायर्ड सेना के कर्नल हैं। 15 अप्रैल को उनके पास फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका मोबाइल नंबर बंद किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। वहां मौजूद ठग ने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल मुंबई में अवैध बैंक खाता खोलने और मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश धोखाधड़ी तथा आतंकी फंडिंग में किया गया है।
आरबीआई के नाम से तैयार फर्जी दस्तावेज
ठगों ने विश्वास में लेने के लिए फर्जी ईडी गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट के दस्तावेज, अग्रिम जमानत संबंधी कागजात और बॉम्बे हाईकोर्ट तथा आरबीआई के नाम से तैयार फर्जी दस्तावेज भेजे। इसके बाद पीड़ित और उनकी पत्नी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किए जाने का दावा कर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। आरोपियों ने उनकी संपत्ति की जानकारी हासिल की और आरबीआई के कथित निर्देशों का हवाला देकर 15.50 लाख रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए। 19 अप्रैल को साइबर थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने रकम के मनी ट्रेल और बैंक खातों की जांच शुरू की। तकनीकी जांच में रकम लुधियाना निवासी सरबजीत के करंट अकाउंट में पहुंचने का पता चला।
पूछताछ में सामने आया कि सरबजीत ने अपना खाता सूरज को दिया था। सूरज की पहचान बैंक कर्मचारी संदीप के माध्यम से हुई थी। इसके बाद सूरज ने टेलीग्राम के जरिए सीकर निवासी नरेश उर्फ लकी से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी बैंक खाते की किट लेकर जयपुर पहुंचे और उसे नरेश को सौंप दिया। नरेश इन खातों को आगे कंबोडिया और दुबई में बैठे साइबर ठगी के ऑपरेटरों तक पहुंचाता था।



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