छात्रों को ‘फ्री थिंकिंग’ के लिए दें समय: सीबीएसई ने नए पाठ्यक्रम को लेकर प्रिंसिपलों को दी सलाह

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CBSE Problem Solving Approach: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा तीन से आठ तक के छात्रों के लिए हाल ही में जारी किए गये कम्यूटेशनल थिंकिंग एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (सीटी एंड एआई) पाठ्यक्रम में छात्रों की चिंतन व तर्क क्षमता बढ़ाने पर विशेष रूप से जोर‌ दिया गया है। इस पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों में दिए गए प्रश्न चिंतन-आधारित हैं औरविश्लेषण, तर्क और समस्या के समाधान को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किए गए हैं। सीबीएसई ने स्कूलों के प्रिंसपिलों को विशेष रूप से निर्देश दिये हैं कि शिक्षकों को बताएं कि वे एक सुगम दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों…

CBSE Problem Solving Approach: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा तीन से आठ तक के छात्रों के लिए हाल ही में जारी किए गये कम्यूटेशनल थिंकिंग एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (सीटी एंड एआई) पाठ्यक्रम में छात्रों की चिंतन व तर्क क्षमता बढ़ाने पर विशेष रूप से जोर‌ दिया गया है। इस पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों में दिए गए प्रश्न चिंतन-आधारित हैं औरविश्लेषण, तर्क और समस्या के समाधान को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किए गए हैं। सीबीएसई ने स्कूलों के प्रिंसपिलों को विशेष रूप से निर्देश दिये हैं कि शिक्षकों को बताएं कि वे एक सुगम दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों को समस्या का सीधे समाधान प्रदान करने के बजाय उन्हें संकेतों और चर्चाओं के माध्यम से समझाएं। छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने और प्रयास करने के लिए समय दिया जाना चाहिए। जिसके बाद कक्षा में चर्चा होनी चाहिए जहां विभिन्न दृष्टिकोणों को साझा किया जाए और उनका पता लगाया जाए।

सहज ज्ञान और सहभागिता को बढ़ावा

सीबीएसई ने कहा कि कुछ अध्यायों में ऐसी गतिविधियां भी शामिल हैं जो सहज ज्ञान और सहभागिता को बढ़ावा देती हैं। इन गतिविधियों को प्रश्नों को हल करने से पहले किया जाना चाहिए, क्योंकि ये छात्रों को समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती हैं। बोर्ड का मानना है कि शिक्षक इन पुस्तकों को इस मानसिकता के साथ पढ़ाएं कि सही उत्तर तक पहुंचने की तुलना में सोचने की प्रक्रिया अधिक महत्वपूर्ण है। सीबीएसई का कहना है कि एक सुरक्षित और प्रोत्साहनपूर्ण वातावरण बनाना आवश्यक है जहां छात्र गलतियां करने, विभिन्न रणनीतियों का पता लगाने और अपने तर्क व्यक्त करने में सहज महसूस करें।लक्ष्य केवल शुद्धता पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय आत्मविश्वासी, स्वतंत्र विचारकों का पोषण करना है।

उद्देश्य 2030 तक एआई-साक्षर छात्रों का निर्माण करना

यहां बता दें कि सीटी एंड एआई करिकुलम फ्रेमवर्क का उद्देश्य 2030 तक एआई-साक्षर छात्रों का निर्माण करना है। पाठ्यक्रम में प्रारंभिक स्तर से ही एआई + इथिक्स + इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मुक्त शिक्षा को एक एकीकृत राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के रूप में अनिवार्य किया गया है। बोर्ड ने कहा कि सत्र 2025-26 तक चल रहे एआई से संबंधित अन्य सभी पाठ्यक्रम कक्षा IX, सत्र 2026-27 के लिए बंद किए जा रहे हैं। सत्र 2026-27 के लिए कक्षा X के छात्र 2025-26 में अपनाई गई योजना के अनुसार ही पढ़ाई जारी रखेंगे।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।