खुद की किडनी बेच रैकेट की एजेंट बनी ‘चांदना’ गिरफ्तार

Summary :

किडनी कांड में फरार एजेंट चांदना गुड़िया (40) को हावड़ा के जगाछा स्थित जीआईपी कॉलोनी से गिरफ्तार कर सोमवार रात डोईवाला थाना पुलिस दून पहुंच गई।

देहरादून : बीते वर्ष 11 सितंबर को लालतप्पड़ स्थित गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल में पकड़े गए किडनी कांड में फरार एजेंट चांदना गुड़िया (40) को हावड़ा के जगाछा स्थित जीआईपी कॉलोनी से गिरफ्तार कर सोमवार रात डोईवाला थाना पुलिस दून पहुंच गई। गिरफ्तार चांदना गुड़िया से पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि बेटी की पढ़ाई के लिए रुपये नहीं होने पर साढ़े चार लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने के बाद वह किडनी रैकेट से जुड़ी और एजेंट बन गई।

चांदना ने पुलिस को बताया कि उसने करीब दो वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के समाचार पत्रों में किडनी डोनेट करने पर मदद का विज्ञापन पढ़ा। उसमें दिए गए नंबर पर फोन किया तो किडनी रैकेट सरगना अमित राउत और उसकी टीम ने साढ़े चार लाख रुपये में चांदना की किडनी निकालकर अपने ग्राहक को ट्रांसप्लांट कर दी। रुपयों के लालच में इसके बाद चांदना किडनी रैकेट गैंग से जुड़ गई और लोगों को रुपयों का झांसा देकर वहां से करीब एक दर्जन ग्राहक किडनी बेचने के लिए लालतप्पड़ भेजे। चांदना को इसके एवज में पचास हजार रुपये से एक लाख रुपये तक मिलते थे।

लालतप्पड़ में किडनी रैकेट पकड़े जाने के पहले चांदना रैकेट संचालकों के संपर्क में थी। लेकिन जैसे ही गैंग के पकड़े जाने का पता लगा तो वह अंडर ग्राउंड हो गई और हावड़ा में जाकर किराए का घर लेकर टिफिन सप्लाई का काम शुरू कर दिया। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि चांदना की हावड़ा में होने की भनक लगने पर लालतप्पड़ चौकी इंचार्ज के साथ पुलिस टीम वहां भेजी गई। दून पुलिस ने हवाड़ा पुलिस की मदद से चांदना को गिरफ्तार किया और पांच दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दून आई है। आरोप है कि पश्चिम बंगाल के जगाछा स्थित जीआईपी कालोनी में वह स्वास्थ्य केंद्र की आड़ में किडनी तस्करी का धंधा चला रही थी। आरोप है कि वर्ष 2017 में हावड़ा की दो महिलाओं को वह उत्तराखंड के हरिद्वार लाई। वहां से धोखे से लाल तप्पड़ लाकर उनकी किडनी निकलवा दी गई।

Desk Team