जनगणना कर्मी से बदसलूकी में 40 घंटे के भीतर चार्जशीट, 22 दिन में दोषी करार

Summary :

Delhi News : आमतौर पर अदालतों में मामलों के निपटारे में महीनों और वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन द्वारका डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने एक महिला जनगणना कर्मी को महज 22 दिनों में न्याय दिलाकर एक नई मिसाल कायम कर दी है। डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह ने बताया कि मामला 19 मई 2026 का है, जब आधिकारिक जनगणना ड्यूटी के दौरान एक महिला एन्यूमरेटर के साथ एक मकान मालिक द्वारा अभद्र व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने की शिकायत द्वारका नॉर्थ थाने में दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं…

Delhi News : आमतौर पर अदालतों में मामलों के निपटारे में महीनों और वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन द्वारका डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने एक महिला जनगणना कर्मी को महज 22 दिनों में न्याय दिलाकर एक नई मिसाल कायम कर दी है। डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह ने बताया कि मामला 19 मई 2026 का है, जब आधिकारिक जनगणना ड्यूटी के दौरान एक महिला एन्यूमरेटर के साथ एक मकान मालिक द्वारा अभद्र व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने की शिकायत द्वारका नॉर्थ थाने में दर्ज कराई गई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। एसएचओ द्वारका नॉर्थ की निगरानी में महिला सब इस्पेक्टर नीलू ने मामले की जांच संभाली। आरोपी घटना के बाद फरार हो गया था, लेकिन पुलिस टीम ने उसे ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया। 20 मई को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां पीड़िता और प्रत्यक्षदर्शी के बयान नियमानुसार दर्ज कराए गए।

द्वारका पुलिस की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट तैयार कर ली गई। एफआईआर दर्ज होने के मात्र 40 घंटे के भीतर चार्जशीट अदालत में दाखिल कर स्पीडी ट्रायल की मांग की गई। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करते हुए 12 जून को आरोपी को दोषी करार दे दिया।

“महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”

डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह ने जांच अधिकारी सब इस्पेक्टर नीलू, एसएचओ द्वारका नॉर्थ और एसीपी द्वारका की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी इस्तेमाल से यह साबित हुआ है कि इच्छाशक्ति और पेशेवर जांच के बल पर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाया जा सकता है।

महिला जनगणना कर्मी को मिली यह त्वरित राहत न केवल न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान महिलाओं से दुर्व्यवहार करने वालों को कानून से बचने का मौका नहीं मिलेगा। यही वजह है कि द्वारका पुलिस की यह कार्रवाई आज पुलिस महकमे में चर्चा और सराहना का विषय बनी हुई है।

यह भी पढ़ें : https://www.punjabkesari.com/delhi-ncr-news/fire-breaks-out-in-five-storey/

Avinay