नागरिकता कानून का एनआरसी से कोई संबंध नहीं

Summary :

नागरिकता संशोधन कानून का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। एनआरसी का कानूनी प्रावधान दिसंबर 2004 से नागरिकता कानून, 1955 का हिस्सा है।

नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन कानून का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है। एनआरसी का कानूनी प्रावधान दिसंबर 2004 से नागरिकता कानून, 1955 का हिस्सा है। इसके अलावा इन कानूनी प्रावधानों को संचालित करने के लिए विशेष वैधानिक नियम बनाए गए हैं। ये भारतीय नागरिकों के पंजीकरण और उनको राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। ये कानूनी प्रावधान कानून की किताबों में पिछले 15-16 साल से हैं। सीएए ने इसे किसी भी तरह से नहीं बदला है। 
यहां यह बता दें कि लगातार यह अफवाह उड़ाई जा रही है कि नागरिकता संशोधन कानून धीरे-धीरे भारतीय मुस्लिमों को भारत की नागरिकता से बाहर कर देगा? जबकि यह कोरी अफवाह के सिवाय कुछ नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून किसी भी भारतीय नागरिक पर किसी भी तरह से लागू नहीं होगा। सभी भारतीय नागरिकों को मूलधिकार मिला हुआ है जिसकी गारंटी भारतीय संविधान ने दी है। सीएए का मतलब किसी भी भारतीय को नागरिकता से वंचित करना नहीं है। इसकी बजाय यह एक विशेष कानून है जो विदेशी नागरिकों खासकर तीन पड़ोसी देशों के लोगों को भारतीय नागरिकता देगा जो कुछ विशेष परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। 
यही नहीं सीएए का किसी भी विदेशी को भारत से बाहर भेजने से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने, चाहे वह किसी भी धर्म या देश का हो, की प्रक्रिया फॉरनर्स एक्ट 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) एक्ट 1920 के तहत की जाती है। ये दोनों कानून, सभी विदेशियों- चाहे वे किसी भी देश अथवा धर्म के हों, देश में प्रवेश करने, रिहाइश, भारत में घूमने-फिरने और देश से बाहर जाने की प्रक्रिया को देखते हैं। इसलिए सामान्य निर्वासन प्रक्रिया सिर्फ गैरकानूनी रूप से भारत में रह रहे विदेशियों पर लागू होगी। 
यह पूरी तरह सोच-समझ कर बनाई गई कानूनी प्रक्रिया है जो स्थानीय पुलिस अथवा प्रशासनिक प्राधिकारियों द्वारा गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए की गई जांच के बाद तैयार की गई है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि ऐसे गैरकानूनी विदेशी को उसके देश के दूतावास ने उचित यात्रा दस्तावेज दिए गए हों ताकि जब उन्हें डिपोर्ट किया जाए तो उनके देश के अधिकारियों द्वारा उन्हें सही प्रकार से रिसीव किया जा सके। 
असल में, ऐसे लोगों को देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब कोई व्यक्ति को द फॉरनर्स एक्ट-1946 के तहत ‘विदेशी’ साबित हो जाएगा। इसलिए पूरी प्रक्रिया में स्वचालित, मशीनी या भेदभावपूर्ण नहीं है। राज्य सरकारों और उनके जिला प्रशासन के पास फॉरनर्स एक्ट के सेक्शन 3 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) एक्ट 1920 के सेक्शन-5 के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदुत्त शक्तियां होती हैं, जिससे वे गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशी की पहचान कर सकता है, हिरासत में रख सकता है और उसके देश भेज सकता है।
एनआरसी सिर्फ असम में लागू है, जबकि सीएए को पूरे देश में लागू किया गया 
एनआरसी बहरहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा। सच यह है कि एनआरसी अभी तक राज्य विशेष में लागू है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नस्ली विशिष्टता को बनाए रखने के लिए एनआरसी असम में लागू किया गया है जिसके तहत राज्य से अवैध अप्रवासियों को बाहर करने का जिक्र किया गया है। 
असम के अलावा यह किसी दूसरी जगह लागू नहीं है। जबकी नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रव्यापी है और यह पूरे भारत में लागू होगा। हालांकि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसका विरोध करते हुए उनके राज्य में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कही है, लेकिन संविधान के जानकारों का मानना है कि इसके लागू किए जाने पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

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