Delhi Pradesh Congress : दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली में बारिश के बाद लगातार बने जलभराव की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजधानी में हर वर्ष मानसून के दौरान पैदा होने वाला जलभराव अब आपदा का रूप ले चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मांग की कि सरकार सिर्फ घोषणाओं और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से बाहर निकलकर जलभराव और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान करे। उन्होंने कहा कि दिल्ली मास्टर प्लान-2047 लागू होने में अभी समय है, लेकिन दिल्ली की जनता को आज की समस्याओं से राहत चाहिए।
जलभराव रोकने के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ- देवेन्द्र यादव
देवेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह कहना कि दिल्ली में जलभराव एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस पर व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा, इस बात का प्रमाण है कि भाजपा सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जलभराव रोकने के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। पिछले 12-13 वर्षों से दिल्लीवासी हर मानसून में जलभराव, ट्रैफिक जाम और जल निकासी की बदहाल व्यवस्था से जूझ रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है।
BJP और AAP पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप- देवेन्द्र यादव
उन्होंने कहा कि जलभराव को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों दलों की सरकारों के दौरान जल निकासी और नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। इसका खामियाजा दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कलश यात्रा के उद्घाटन समारोह में पहुंची मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित वीआईपी लोगों को भी तालकटोरा स्टेडियम के आसपास बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। देवेन्द्र यादव ने कहा कि बाहरी, पूर्वी, उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के अनेक इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर है। वहीं कनॉट प्लेस, उद्योग भवन, गोल मार्केट, लोधी रोड और सरोजनी नगर जैसे विकसित और वीआईपी क्षेत्रों में भी जलभराव ने सरकारी एजेंसियों की तैयारियों की पोल खोल दी है।
नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च, फिर भी सड़कों पर पानी- देवेन्द्र यादव
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की जल निकासी व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों और संबंधित विभागों की है, इसलिए यहां होने वाले जलभराव की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल निकासी और नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन मानसून आते ही सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों की गलियों का तालाब में तब्दील होना व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। सरकार को सिर्फ कागजों में काम पूरा दिखाने के बजाय इसकी स्वतंत्र जांच कराकर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।



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