दिल्ली विधानसभा में प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों का संवैधानिक संवाद

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Delhi Legislative Assembly : दिल्ली विधानसभा में युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत 45 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने विधानसभा का भ्रमण किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शक्तियों के विभाजन को संवैधानिक संतुलन का आधार बताते हुए न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय और परस्पर सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत दिल्ली न्यायिक अकादमी के 45 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शक्तियों का विभाजन संस्थाओं को अलग-थलग करने का सिद्धांत नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित…

Delhi Legislative Assembly : दिल्ली विधानसभा में युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत 45 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने विधानसभा का भ्रमण किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शक्तियों के विभाजन को संवैधानिक संतुलन का आधार बताते हुए न्यायपालिका और विधायिका के बीच समन्वय और परस्पर सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को युवा जनसंपर्क कार्यक्रम के तहत दिल्ली न्यायिक अकादमी के 45 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शक्तियों का विभाजन संस्थाओं को अलग-थलग करने का सिद्धांत नहीं, बल्कि संविधान द्वारा निर्धारित संतुलित व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि विधायिका और न्यायपालिका की भूमिकाएं अलग-अलग होते हुए भी दोनों का उद्देश्य न्याय, जवाबदेही और कानून के शासन को मजबूत करना है।

उन्होंने प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों और विधि छात्रों से कानून को केवल नियमों का संग्रह नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने का माध्यम मानने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, लोकसभा के पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचार्य, दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (विधि) रीतेश सिंह तथा विधानसभा सचिव डॉ. युमनाम अरुण कुमार भी मौजूद रहे।
पूर्व महासचिव पी. डी. टी. आचार्य ने कहा कि भारतीय संविधान में शक्तियों का विभाजन कठोर नहीं, बल्कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलित व्यवस्था पर आधारित है।

उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका, विधायी विशेषाधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रधान सचिव रीतेश सिंह ने बताया कि पहली बार न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा भ्रमण को शामिल किया गया है। अब इसे दिल्ली न्यायिक अकादमी के वार्षिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का औपचारिक हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने विधानसभा की विधायी विरासत के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने विधानसभा सदन का भ्रमण किया, ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री देखी और “एक शताब्दी यात्रा” कॉफी टेबल बुक की प्रस्तुति का अवलोकन किया।

Sumant Chaudhary