Court Orders DCP Action: एक आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करना जांच अधिकारी (आईओ) को भारी पड़ गया है। कोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन न करने पर डीसीपी को आईओ के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने आरोपी की जमानत पर रिहा करने का आदेश भी दिया है। ये पूरा मामला राजधानी के बवाना थाने में आरोपी हिमांशु के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ पिछले साल बीएनएस की धारा-333/110/351(2)/74/76/3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
आरोपी को नहीं बताई गई गिरफ्तारी की वजह
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता रवि दराल ने गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए कहा कि पुलिस ने नियमों के तहत आरोपी को गिरफ्तारी के आधार के बारे में जानकारी नहीं दी। अधिवक्ता रवि दराल ने साल 2024 में प्रबीर पुरकायस्थ बनाम दिल्ली सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया ही अपने आप में अवैध हैं। अधिवक्ता रवि दराल ने आगे दलील दी कि कथित घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है और शिकायतकर्ता द्वारा पेश किया गया फुटेज भी फर्जी है।
आरोपी के पिता को गिरफ्तारी के बारे में दी थी जानकारी: आईओ
इस मामले में जहां शिकायतकर्ता ने कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज पेश किया था, वहीं, सुनवाई के दौरान आईओ ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में कोई भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाया है। आईओ ने आगे यह भी बताया कि पिछले साल 12 दिसबंर के आदेश में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आईओ ने आरोपी की गिरफ्तारी के बारे में उसके पिता को सूचित कर दिया है। साथ ही आईओ ने आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के कारणों के बारे में भी बताया था।
आईओ के खिलाफ कार्रवाई करें डीसीपी: कोर्ट
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना ने आईओ द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के आधार के बारे में जानकारी देने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि केस फाइल में आरोपी की गिरफ्तारी का केवल एक ही दस्तावेज़ मौजूद है, जिसमें गिरफ्तारी के आधार वाला कॉलम खाली है। कोर्ट ने संबंधित डीसीपी को नोटिस जारी करते हुए कहा वे इस बात पर ध्यान दें कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, आरोपी को कानून के अनुसार गिरफ्तार नहीं किया गया। ऐसे में डीसीपी को निर्देश दिया जाता है कि वे आईओ के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करें। कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि आईओ ने कहा कि इस मामले में कोई भी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला था जबकि शिकायतकर्ता ने जमानत पर बहस के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज पेश किया था और आईओ इसके बारे में भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन?
- यदि अपराध में अधिकतम सात वर्ष तक की सजा है, तो पुलिस सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। आरोपी को पहले नोटिस जारी कर जांच में सहयोग करने के लिए बुलाना होगा।
- गिरफ्तारी के कारणों को लिखित रूप में बताना अनिवार्य है और यह जानकारी उस भाषा में होनी चाहिए जिसे गिरफ्तार व्यक्ति समझ सके।
- गिरफ्तारी के लिखित कारण मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले दिए जाने चाहिए, अन्यथा गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है।
- गिरफ्तारी पुलिस की सुविधा का तरीका नहीं हो सकती। पुलिस को लिखित में कारण बताना होगा कि बिना कस्टडी (हिरासत) के जांच क्यों नहीं की जा सकती।
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