Cyber fraud : एक वीडियो कॉल… सामने खुद को सीबीआई, एटीएस, पुलिस या आईपीएस अधिकारी बताने वाले लोग… फिर गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी। डर के इस साइबर जाल में फंसकर महिला ने अपनी मेहनत की 7.22 लाख रुपये की जमा-पूंजी गंवा दी, लेकिन दक्षिण जिला साइबर थाना पुलिस ने इस हाईटेक ठगी का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि थाईलैंड और म्यांमार में बैठे साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग किट उपलब्ध कराकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 6 मोबाइल फोन, लैपटॉप, 18 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड, 7 चेक बुक और 6 आधार कार्ड बरामद किए हैं।
डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि कार्रवाई इंस्पेक्टर हंसराज स्वामी के नेतृत्व में गठित टीम ने की। पीड़िता ने शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने खुद को सीबीआई, एटीएस, पुलिस या आईपीएस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर घंटों तक उसे “डिजिटल अरेस्ट” होने का डर दिखाया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय पैदा कर आरोपियों ने उससे आरटीजीएस के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में 7.22 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को कर लिया गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों की लेयरिंग, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच के आधार पर टीम ने दक्षिण 24 परगना और हावड़ा (पश्चिम बंगाल) में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी साइबर ठगों को म्यूल बैंक अकाउंट, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंकिंग किट उपलब्ध कराते थे।
इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर आखिरकार थाईलैंड और म्यांमार में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों, मनी ट्रेल और विदेश में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।
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