Delhi : राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार रात हुई मूसलाधार बारिश के दौरान विभिन्न इलाकों में कम से कम पांच पेड़ गिरने की घटनाओं ने शहरी विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ बारिश से नहीं, बल्कि वर्षों से हो रहे अंधाधुंध कंक्रीटीकरण, अवैज्ञानिक निर्माण और खराब शहरी नियोजन के कारण कमजोर होकर गिर रहे हैं।
बारिश के बाद पॉश कॉलोनी ईस्ट ऑफ कैलाश और रंजीत नगर समेत कई इलाकों में पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ और एक खड़ी कार क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी ने कहा कि बारिश केवल अंतिम कारण बनती है, जबकि पेड़ों की वास्तविक कमजोरी वर्षों की मानवीय गतिविधियों का परिणाम होती है।
उनके अनुसार, सड़क चौड़ीकरण, पेड़ों के तनों के चारों ओर कंक्रीट बिछाना, नालों का विस्तार और निर्माण कार्य जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पेड़ों की पकड़ कमजोर हो जाती है। उन्होंने कहा कि शहरों में सौंदर्यीकरण पर तो करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन दशकों पुराने पेड़ों के संरक्षण की अनदेखी की जाती है।
पहले पुराने और परिपक्व पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिक जरूरी
दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रो. राधे श्याम शर्मा ने कहा कि हर पेड़ की जड़ संरचना अलग होती है, लेकिन विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय इसका वैज्ञानिक आकलन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि नए पौधे लगाने से पहले पुराने और परिपक्व पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिक जरूरी है। यदि दिल्ली को हरित और सुरक्षित बनाना है तो विकास योजनाओं में वैज्ञानिक वृक्ष प्रबंधन और पुराने पेड़ों के संरक्षण को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा।
तनों के आसपास कंक्रीट होने से पेड़ों की जड़ों को फैलने की नहीं मिलती जगह
नई दिल्ली नेचर के अध्यक्ष वेरहेन खन्ना ने कहा कि तनों के आसपास कंक्रीट होने से पेड़ों की जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिलती, जिससे उन पर दबाव बढ़ता है और तेज बारिश या हवा के दौरान उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने निर्माण गतिविधियों के दौरान जड़ों को होने वाले नुकसान को भी बड़ी वजह बताया।
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