Delhi Government On Kirari Waterlogging: उत्तर-पश्चिम दिल्ली के किरारी इलाके में जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गुरुवार को राजनीतिक विवाद तेज हो गया। तस्वीरें सामने आते ही BJP-नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। यह विवाद ऐसे समय में उभरा, जब नोएडा सेक्टर-150 में पानी भरे गड्ढे में डूबने से हुई मौत को लेकर पहले से ही जन आक्रोश था।
Parvesh Verma: सोशल मीडिया वीडियो से भड़का विवाद, सरकार ने विपक्ष पर बोला हमला
लोक निर्माण विभाग और सिंचाई-बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किरारी के ड्रेनेज संकट के लिए पिछली AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 11 वर्षों में सीवेज रखरखाव पर सिर्फ ₹43 लाख खर्च किए गए और कोई व्यापक सीवर नेटवर्क नहीं बिछाया गया। वर्मा ने 2020 में मंजूर परियोजनाओं के भुगतान न होने से ठप होने का भी जिक्र किया।
Kirari Area Flooding: काम की प्रगति और नई समयसीमा
मंत्री वर्मा के अनुसार मौजूदा सरकार ने रुके प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया है—70% से 84% तक काम पूरा हो चुका है, 54 किमी नई सीवर लाइनें बिछाई गई हैं और जून 2026 तक संशोधित समयसीमा तय की गई है। उन्होंने बताया कि ₹800 करोड़ से अधिक के ड्रेन रीमॉडलिंग प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जिनमें छोटे सीवर नेटवर्क को ट्रंक ड्रेन और एसटीपी से जोड़ा जाएगा।
Delhi Government On Kirari Waterlogging: विपक्ष का पलटवार और राहुल गांधी की टिप्पणी
AAP ने आरोप लगाया कि बाढ़ BJP-नियंत्रित एजेंसियों की “जानबूझकर लापरवाही” का नतीजा है। पार्टी का कहना है कि DDA द्वारा भलस्वा लैंडफिल का कचरा खाली जमीन पर डालने से प्राकृतिक जल निकासी बाधित हुई। AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने चेतावनियों की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर इसे शासन-विफलता का “नया सामान्य” बताया।
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