Delhi हाईकोर्ट का आदेश: दृष्टिबाधित छात्र को मुहैया कराएं निःशुल्क आवास

Summary :

Delhi उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को छात्रावास से बाहर निकाले गए एक दृष्टिबाधित छात्र को परिसर के अतिथि गृह में अल्पकालिक, शुल्क-मुक्त निवास देने का आदेश दिया है। Highlights: दृष्टिबाधित छात्र से प्रतिदिन 100 रुपये शुल्क लिया जा रहा था, जो वित्तीय क्षमता से अधिक था व्यक्तिगत विकलांगताओं पर विचार किए बिना ऐसे नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है- राहुल बजाज सुनवाई की अगली तारीख तक छात्र को बिना किसी शुल्क के कमरे में रहने की अनुमति  अदालत का आदेश तब आया, जब छात्र के वकील ने खुलासा किया कि अदालत के पूर्व आदेश के अनुसार 100 प्रतिशत…

Delhi उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को छात्रावास से बाहर निकाले गए एक दृष्टिबाधित छात्र को परिसर के अतिथि गृह में अल्पकालिक, शुल्क-मुक्त निवास देने का आदेश दिया है।

Highlights:

  • दृष्टिबाधित छात्र से प्रतिदिन 100 रुपये शुल्क लिया जा रहा था, जो वित्तीय क्षमता से अधिक था
  • व्यक्तिगत विकलांगताओं पर विचार किए बिना ऐसे नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है- राहुल बजाज
  • सुनवाई की अगली तारीख तक छात्र को बिना किसी शुल्क के कमरे में रहने की अनुमति 

अदालत का आदेश तब आया, जब छात्र के वकील ने खुलासा किया कि अदालत के पूर्व आदेश के अनुसार 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित छात्र को अंतरिम आवास प्रदान किया गया था और उससे प्रतिदिन 100 रुपये का शुल्क लिया जा रहा था, जो उसकी वित्तीय क्षमता से अधिक था। न्यायमूर्ति हरि शंकर ने संजीव कुमार मिश्रा को छात्रावास से बेदखल करने को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब देने के लिए विश्‍वविद्यालय को 10 दिनों का अंतिम अवसर दिया।

चुनौती इस आधार पर आधारित है कि दूसरे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्र के लिए छात्रावास आवास पर रोक लगाने वाले लागू नियमों में व्यक्तिगत शारीरिक विकलांगताओं पर विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील राहुल बजाज ने तर्क दिया कि व्यक्तिगत विकलांगताओं पर विचार किए बिना ऐसे नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि जेएनयू आवास के लिए प्रतिदिन 100 रुपये ले रहा है, उच्च न्यायालय ने 22 जनवरी को विश्‍वविद्यालय को निर्देश दिया था कि सुनवाई की अगली तारीख तक छात्र को बिना किसी शुल्क के कमरे में रहने की अनुमति दी जाए।

इससे पहले, 4 जनवरी को जेएनयू के वकील ने मिश्रा के लिए अस्थायी आवास की पेशकश की थी और अदालत ने कहा था कि यह अंतरिम व्यवस्था पूरी तरह से याचिकाकर्ता को चल रही कठिनाइयों को सहन करने से रोकने के लिए थी। अब, अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई और निपटान के लिए 12 फरवरी को सूचीबद्ध किया है, और दोनों पक्षों को अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है।

 

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Desk Team