सालों बाद दास कैडर को इंसाफ, 200 अधिकारियों को मिला ग्रुप ‘ए’ पोस्ट में प्रमोशन

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Delhi : सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे (दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन सबोर्डिनेट सर्विस) दास कैडर के अधिकारियों को आखिरकार इंसाफ मिल गया। दास कैडर के 200 ग्रेड-1 अधिकारियों को पद बनने के बाद पहली बार दिल्ली सरकार में ग्रुप-ए के पदों पर प्रमोशन मिला है। इन पदों के सृजन का दानिक्स एसोसिएशन ने कैट, हाईकोर्ट की सिंगल व डबल बेंच और ‌फिर सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर विरोध किया था। अब जाकर दास कैडर के 200 ग्रेड-1 अधिकारियों को ग्रुप ए पदों पर प्रमोशन मिला है। इनमें से कुछ अधिकारी ऐसे है जिनको एक ही स्केल पर 25 साल तक…

Delhi : सालों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे (दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन सबोर्डिनेट सर्विस) दास कैडर के अधिकारियों को आखिरकार इंसाफ मिल गया। दास कैडर के 200 ग्रेड-1 अधिकारियों को पद बनने के बाद पहली बार दिल्ली सरकार में ग्रुप-ए के पदों पर प्रमोशन मिला है। इन पदों के सृजन का दानिक्स एसोसिएशन ने कैट, हाईकोर्ट की सिंगल व डबल बेंच और ‌फिर सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर विरोध किया था।

अब जाकर दास कैडर के 200 ग्रेड-1 अधिकारियों को ग्रुप ए पदों पर प्रमोशन मिला है। इनमें से कुछ अधिकारी ऐसे है जिनको एक ही स्केल पर 25 साल तक रुके रहने के बाद प्रमोशन मिला।

इस आदेश के जारी होने पर दास एसोसिएशन के महासचिव मनोज कुमार अंबाष्ट ने खुशी जतायी है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षो की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट के समक्ष गृहमंत्रालय, दिल्ली सरकार और दास ऑफिसर्स एसोसिएशन की एक त्रिपाक्षीय संधि पेश की गई, जिसके तहत एलजी ने दास कैडर में 6600/- ग्रेड पे का 217 प्रमोशनल पोस्ट ग्रुप ए में बनाने का नोटिफिकेशन जारी किया।

इस नोटिफिकेशन को दानिक्स एसोसिएशन ने पहले कैट में फिर हाई कोर्ट की सिंगल, फिर डबल पीठ में और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने हर बार दास कैडर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। हालांकि अभी हाईकोर्ट में मामला लंबित है फिर भी कोर्ट ने दास कैडर के अधिकारियों को कंडीशनल प्रमोशन देने का आदेश कर दिया।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दिल्ली सरकार द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि यूपीएससी ने ग्रेड-वन (जीएनसीटीदास) से सीनियर स्केल (जीएनसीटीदास) के पद पर प्रमोशन के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमिटी (डीपीसी) की सिफारिशें भेजीं और नियुक्ति करने वाले अधिकारी के तौर पर उपराज्यपाल ने इन्हें मंजूरी दे दी है।

इसके अलावा हाई‌कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए ‘सिलेक्ट लिस्ट’ (अनुबंध-I) में शामिल सभी अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप (अनुबंध-II) के अनुसार, एक वचन-पत्र (अंडरटेकिंग) देना आवश्यक है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इस पत्र के जारी होने के दो कामकाजी दिनों के भीतर विधिवत भरे हुए और स्याही से हस्ताक्षरित प्रोफार्मा (अनुलग्नक-II के अनुसार) सीधे सेवा विभाग को या तो व्यक्तिगत रूप से या आधिकारिक ईमेल आईडी से सेवा विभाग की ईमेल आईडी पर भेजें।

“हमारा प्रमोशन दानिक्स कैडर के लिए केवल अहम की लड़ाई थी”

मनोज कुमार अंबाष्ट ने बताया कि हमारा प्रमोशन दानिक्स कैडर के लिए केवल एक अहम की लड़ाई थी,उनका मानना था कि हमारा ग्रुप-ए में प्रमोशन दानिक्स कैडर के समकक्ष पोस्ट क्रिएट करवाना है, जबकि हम केवल वर्षों से व‌ंचित अपने अधिकार की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि द‌ानिक्स अधिकारी चाहते थे कि दास कैडर वाले दानिक्स बनें जबकि दानिक्स कैडर में ज्यादा पोस्ट न‌हीं थी।

इसके विरोध में दानिक्स कैडर वाले कैट में गये, हाईकोर्ट की सिंगल डबल बेंच में गये और बाद में सुप्रीमकोर्ट गये लेकिन फैसला हमारे हक में आया और गृहमंत्रालय ने 6600 ग्रेड पे (ए-1 पोस्ट) क्रिएट करके हमें इंसाफ दे दिया।

1967 से पुनर्गठन का इंतजार कर रहा था दास कैडर

मनोज कुमार अंबाष्ट ने बताया कि दास कैडर 1967 से अपने पुनर्गठन का इंतजार कर रहा था। दिल्ली सरकार का यह कैडर इस सरकार की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन इसके बावाजूद यह कैडर वर्षों से उपेक्षा और दमन का शिकार रहा था। इसमें कार्यरत सैंकड़ों अधिकारी अपने पूरे कार्यकाल में बस एक प्रमोशन पाकर काम करने को मजबूर थे लेकिन अंतत: हमारे साथ इंसाफ हुआ।

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Avinay