12 दिन की ट्रेनिंग, ₹4,800 वजीफा, कारीगरों की ग्लोबल मार्केट तक पहुंच, दिल्ली सरकार ने ‘CM Skill Development Scheme’ को दी मंजूरी

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Delhi News: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने परंपरागत कामगारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना खादी, हथकरघा, कुटीर उद्योग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े हजारों कारीगरों को प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) , बाजार और आर्थिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के कारीगर हमारी सांस्कृतिक पहचान के वास्तविक संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से ये कारीगर अपने हुनर से समाज को मजबूत बनाते रहे हैं, लेकिन बदलते समय में उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सीधे बाजार से जुड़ने की आवश्यकता है। यह योजना सुनिश्चित करेगी कि वे नई अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाए रखें और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आगे बढ़ें।

Delhi News: कौशल विकास को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की पहल

‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौशल विकास को देश की प्रगति का मूल आधार बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने, ब्रांडिंग को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण सुधार और गुणवत्ता उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। दिल्ली सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कौशल को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने का काम कर रही है।

CM Rekha Gupta: योजना का संचालन और बजट प्रावधान

यह योजना दिल्ली खादी और ग्राम उद्योग बोर्ड (डीकेवीआईबी) के माध्यम से लागू की जाएगी। वर्ष 2025-26 में 3,728 लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ₹8.95 करोड़ की राशि पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है। साल  2026-27 में इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने के लिए लगभग ₹57.50 करोड़ के बजट का प्रस्ताव रखा गया है।

12 दिन का प्रशिक्षण, वजीफा और टूलकिट

योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 12 दिन यानी 96 घंटे का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें दो दिन का उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) भी शामिल होगा। प्रशिक्षण छोटे समूहों (35-45 प्रतिभागियों) में आयोजित किया जाएगा ताकि प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल सके।

प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रत्येक प्रतिभागी को ₹4,800 का वजीफा (₹400 प्रतिदिन) दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त भोजन के लिए ₹100 प्रतिदिन की राशि भी प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद लाभार्थियों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनमें जरूरत के अनुसार पैर से चलने वाली सिलाई मशीन भी शामिल हो सकती है।

डिजिटल ऑनबोर्डिंग और वैश्विक बाजार से जुड़ाव

इस योजना की एक विशेष विशेषता डिजिटल पंजीकरण है। प्रत्येक कारीगर की प्रोफाइल, फोटो और उत्पाद विवरण के साथ एक ई-कैटलॉग तैयार किया जाएगा। इसे ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जिससे उनके उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों के बाजारों तक भी पहुंच सकेंगे।

आरपीएल के माध्यम से अनुभव का प्रमाणन

योजना में पूर्व अनुभव की मान्यता (Recognition of Prior Learning – RPL) को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से पहले से कार्यरत पारंपरिक कारीगरों के कौशल को औपचारिक प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे उन्हें बेहतर आय के अवसर मिलेंगे और वे औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे। लाभार्थियों को मुख्यमंत्री द्वारा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र भी दिया जाएगा। साथ ही उद्यम (एमएसएमई) पंजीकरण, ब्रांडिंग सहयोग और ऋण सुविधाओं तक पहुंच के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

ई-श्रम पंजीकृत श्रमिकों को प्राथमिकता

पहले चरण में ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 18,000 दर्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी। भविष्य में इस योजना का विस्तार करते हुए कढ़ाई करने वाले, सिलाई कार्यकर्ता, कुम्हार, बढ़ई, मोची, टोकरी और चटाई बनाने वाले, इत्र निर्माता, बांस शिल्पकार, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले, कालीन बुनकर और अन्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को भी शामिल किया जाएगा।

पारदर्शिता और सख्त निगरानी

इस योजना के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। एक परिवार से केवल एक सदस्य ही पात्र होगा। सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। आवेदन के समय आधार आधारित पहचान और सत्यापन अनिवार्य रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कौशल को सीधे रोजगार और आय से जोड़कर हर कारीगर को सम्मान और अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

उन्होंने आगे कहा कि सरकार खादी, हथकरघा और ग्राम उद्योगों से जुड़े श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि एक व्यापक पहल है, जो कौशल, तकनीक, बाजार तक पहुंच और आर्थिक सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ती है। इससे दिल्ली के हजारों कारीगरों को नई पहचान, नई दिशा और बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इस योजना को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कौशल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों को आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाने का प्रयास है। मर्चेंडाइजिंग, लॉजिस्टिक्स, आईटी संचालन और फैशन उत्पादन जैसे पाठ्यक्रम कारीगरों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगे। साथ ही पारंपरिक शिल्प को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढालने में मदद करेंगे।

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