दिल्ली में डीटीसी बसों के ‘पिंक कार्ड’ को लेकर सियासत तेज, आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

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Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा सरकार द्वारा पिंक कार्ड अनिवार्य किए जाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का आरोप है कि इस नई व्यवस्था से खासतौर पर गरीब और दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में रहने वाली महिलाओं के अधिकार प्रभावित होंगे। Delhi News: पिंक कार्ड व्यवस्था पर आप की आपत्ति दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहले दिल्ली में रहने वाली सभी महिलाएं बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के…

Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा सरकार द्वारा पिंक कार्ड अनिवार्य किए जाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का आरोप है कि इस नई व्यवस्था से खासतौर पर गरीब और दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में रहने वाली महिलाओं के अधिकार प्रभावित होंगे।

Delhi News: पिंक कार्ड व्यवस्था पर आप की आपत्ति

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहले दिल्ली में रहने वाली सभी महिलाएं बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा कर सकती थीं। बस में चढ़ने पर उन्हें पिंक टिकट दे दिया जाता था, जिससे यात्रा आसान और सरल रहती थी। अब सरकार ने पिंक टिकट की जगह पिंक कार्ड अनिवार्य करने का फैसला लेकर व्यवस्था को जटिल बना दिया है। उनका सवाल है कि जब पुरानी व्यवस्था सही तरीके से चल रही थी और महिलाओं को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा था, तो नई कार्ड प्रणाली लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी।

दूसरे राज्यों की महिलाओं पर असर का आरोप

आप नेता का कहना है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पूर्वांचल के अन्य इलाकों से आई महिलाएं रहती हैं। पहले उन्हें भी मुफ्त यात्रा का लाभ मिलता था, लेकिन अब पिंक कार्ड बनवाने की शर्त के कारण कई महिलाएं इस सुविधा से वंचित हो सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का आधार कार्ड या स्थानीय दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, जबकि कई महिलाओं के पास अपने मूल राज्य के ही पहचान पत्र हैं। ऐसे में गरीब और कामकाजी महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल बन सकती है।

भ्रष्टाचार की संभावना पर उठाए सवाल

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुफ्त पिंक टिकट व्यवस्था में भ्रष्टाचार की कोई संभावना नहीं थी। बस कंडक्टरों को टिकट के आधार पर भुगतान नहीं मिलता, बल्कि उन्हें तय वेतन दिया जाता है। इसी तरह निजी बस ऑपरेटरों को भी प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान होता है, न कि टिकटों की संख्या के अनुसार। उनका दावा है कि जब व्यवस्था पहले से पारदर्शी थी, तो नई प्रणाली लागू करके अनावश्यक प्रक्रियाएं जोड़ी जा रही हैं, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका बढ़ सकती है।

निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप

आप ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि पिंक कार्ड बनाने के नाम पर किसी निजी कंपनी को ठेका देकर उसे लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना है कि इससे सरकारी धन का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा, जबकि जनता को कोई वास्तविक फायदा नहीं मिलेगा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि गरीब महिलाओं को कार्ड बनवाने के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जहां पहले से ही लंबी प्रक्रियाएं और देरी की समस्या मौजूद है।

दलालों और प्रशासनिक दिक्कतों की आशंका

उन्होंने यह भी कहा कि कई सरकारी कार्यालयों में सामान्य प्रमाण पत्र बनवाने तक के लिए लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पिंक कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शुरू होने पर दलाल सक्रिय हो सकते हैं और जरूरतमंद महिलाओं से पैसे वसूले जाने का खतरा बढ़ जाएगा। आप का आरोप है कि इससे अंतिम फैसला अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर हो जाएगा कि किसे कार्ड मिलेगा और किसे नहीं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे।

सरकार के फैसले पर राजनीतिक हमला

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि यह कदम गरीब वर्ग, खासकर पूर्वांचल की महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा से बाहर करने की कोशिश है। पार्टी ने इसे अनावश्यक और जनता के हितों के खिलाफ बताया। आप नेताओं का कहना है कि जिस योजना से महिलाओं को सीधे लाभ मिल रहा था, उसे जटिल बनाना सही नहीं है। उनका दावा है कि नई व्यवस्था से महिलाओं की सुविधा कम होगी और प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब देखना होगा कि सरकार इस नई व्यवस्था को किस तरह लागू करती है और महिलाओं को इससे वास्तविक रूप से कितना लाभ या नुकसान होता है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।