पूर्वी दिल्ली में बिजली ढांचे का आधुनिकीकरण, मंत्री सूद ने किया स्मार्ट सब-स्टेशन का उद्घाटन

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Delhi : राजधानी की बिजली व्यवस्था को अधिक आधुनिक, भरोसेमंद और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर में अत्याधुनिक भूमिगत विद्युत उपकेंद्र का उद्घाटन किया और इसके साथ ही छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘सोलराइज ईस्ट’ अभियान की शुरुआत की। मंत्री सूद ने कहा कि इन दोनों पहलों से एक ओर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अधिक सुदृढ़ होगी, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी बिजली स्वयं…

Delhi : राजधानी की बिजली व्यवस्था को अधिक आधुनिक, भरोसेमंद और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर में अत्याधुनिक भूमिगत विद्युत उपकेंद्र का उद्घाटन किया और इसके साथ ही छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘सोलराइज ईस्ट’ अभियान की शुरुआत की।

मंत्री सूद ने कहा कि इन दोनों पहलों से एक ओर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अधिक सुदृढ़ होगी, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी बिजली स्वयं उत्पन्न कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे।

कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, जनप्रतिनिधि, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, आवासीय कल्याण समितियों के सदस्य, आवासीय सोसायटियों के प्रतिनिधि, बिजली वितरण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि गांधी नगर में बनाया गया यह नया सबस्टेशन पारंपरिक सबस्टेशन की तुलना में करीब 80 प्रतिशत कम जगह में स्थापित किया गया है। यह आधुनिक तकनीक वाला सबस्टेशन दिल्ली के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक में 2,000 किलोवोल्ट-एम्पियर (केवीए) क्षमता की बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक और दूरदर्शी योजना के साथ कार्य कर रही है। केवल एक वर्ष में बिजली क्षेत्र के विकास पर 1,427 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया गया है। इस राशि से विद्युत पारेषण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, पुराने ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है तथा आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष दिल्ली में अब तक की सर्वाधिक 8,748 मेगावाट बिजली मांग दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद राजधानी के लोगों को किसी बड़े बिजली संकट या व्यापक कटौती का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की योजनाबद्ध तैयारी, बिजली वितरण कंपनियों की क्षमता तथा अभियंताओं के अथक प्रयासों का परिणाम बताया।

गांधी नगर में स्थापित नए भूमिगत विद्युत उपकेंद्र के बारे में सूद ने कहा कि पूर्वी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूमि की कमी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में यह उपकेंद्र पारंपरिक उपकेंद्रों की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत कम स्थान में स्थापित किया गया है। आधुनिक नियंत्रण प्रणाली से सुसज्जित यह व्यवस्था बिजली आपूर्ति की सतत निगरानी, खराबी आने पर त्वरित सुधार तथा अधिक विश्वसनीय सेवा सुनिश्चित करेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में राजधानी के अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी इस प्रकार के आधुनिक उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ‘सोलराइज ईस्ट’ अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सरकार, जनप्रतिनिधियों, आवासीय कल्याण समितियों, नागरिकों और सौर ऊर्जा से जुड़े सहयोगी संस्थानों की साझा पहल है।

इसके माध्यम से पात्र परिवारों को छतों पर सौर संयंत्र लगाने, सरकारी सहायता, विद्युत ग्रिड से जोड़ने की प्रक्रिया तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह अभियान पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में चलाया जाएगा तथा लोगों की सकारात्मक भागीदारी के आधार पर इसे बिजली वितरण कंपनी के अन्य क्षेत्रों तक भी विस्तारित किया जाएगा।

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