Delhi Yamuna Flood Plain O Zone: दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बसे कई इलाकों में इन दिनों लोगों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा अवैध निर्माणों (Illegal Construction) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के कारण हजारों परिवारों पर घर खोने का खतरा मंडरा (Demolition) रहा है। जिन क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है, उन्हें दिल्ली मास्टर प्लान के तहत “O-Zone” यानी यमुना के बाढ़ क्षेत्र (Yamuna Flood Zone) का हिस्सा माना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन का कहना है कि ये इलाके पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हैं और यहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण नियमों के खिलाफ है। हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद इन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
Delhi Yamuna Flood Plain O Zone: क्या है O-Zone?
दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के अनुसार यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र को O-Zone कहा जाता है। यह वह क्षेत्र है जहां बाढ़ के दौरान नदी का पानी फैल सकता है। इस इलाके को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के लिए सुरक्षित रखा गया है। नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में आवासीय कॉलोनियां बसाना, व्यावसायिक गतिविधियां चलाना या स्थायी निर्माण करना अनुमति के दायरे में नहीं आता। बावजूद इसके सालों से यहां बड़ी संख्या में लोगों ने मकान और अन्य ढांचे बना लिए हैं।
O-Zone का दायरा काफी बड़ा है। जानकारी के अनुसार इसमें करीब 94 कॉलोनियां शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 15 लाख घर मौजूद हैं, जिन पर भविष्य में कार्रवाई का खतरा बना हुआ है। यह इलाका वजीराबाद से लेकर ओखला तक फैला हुआ है। कई स्थानों पर प्रशासन ने O-Zone के बोर्ड भी लगाए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है। लोगों को डर है कि यदि कार्रवाई तेज हुई तो उनके घर प्रभावित हो सकते हैं।
Unauthorized Colonies: किन इलाकों में सबसे ज्यादा चिंता?

यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आने वाले कई इलाकों के नाम सामने आए हैं। इनमें झड़ौदा, संगम विहार, वजीराबाद, जगतपुर, नूर कॉलोनी, दीपांशु कॉलोनी और मिलन विहार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर मकान बनाए हैं। ऐसे में कार्रवाई की खबरों ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है।
ग्रीन जोन और रेड जोन

O-Zone को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है—ग्रीन जोन और रेड जोन। इन दोनों क्षेत्रों का उद्देश्य यमुना नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना और पर्यावरणीय संतुलन की रक्षा करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाढ़ क्षेत्र में लगातार निर्माण होता रहा तो नदी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इससे बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है तथा पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता है। 30 अप्रैल को DDA ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था।
इस नोटिस में कहा गया कि O-Zone क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमण हटाए जाएंगे। नोटिस में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री-उदय योजना के तहत शामिल कॉलोनियों को छोड़कर अन्य अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लोगों से अपील की गई कि वे स्वयं ही जगह खाली कर दें, अन्यथा प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ेगी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।
DDA Bulldozer Action: पुनर्वास को लेकर क्या कहा गया?

DDA के नोटिस में प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय और पुनर्वास की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। इसके तहत बटला हाउस और सराय काले खां के आसपास स्थित रैन बसेरों का जिक्र किया गया। हालांकि कई निवासियों का कहना है कि उन्हें अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि यदि उनके घर हटाए जाते हैं तो उन्हें स्थायी रूप से कहां बसाया जाएगा। 5 मई को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने यमुना बाजार क्षेत्र में रहने वाले लगभग 310 परिवारों को नोटिस जारी किया।
नोटिस में कहा गया कि यह इलाका हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, जिससे लोगों और उनकी संपत्ति को गंभीर खतरा रहता है। प्रशासन का तर्क है कि बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्यों में काफी संसाधन खर्च होते हैं। इसलिए लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाढ़ क्षेत्र को खाली कराना जरूरी है।
घाटों के आसपास बढ़ रहा है अतिक्रमण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार यमुना बाजार क्षेत्र में करीब 32 घाट हैं। यहां लगभग 1,100 लोग रहते हैं और 310 के आसपास आवासीय ढांचे मौजूद हैं। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में घाटों और आसपास के इलाकों में अतिक्रमण तेजी से बढ़ा है। NGT पहले ही DDA को यमुना के बाढ़ क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है। इसी के तहत समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं।
सरकार क्यों बता रही है जरूरी?
सरकार का कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र को खाली रखना केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। वर्ष 2023 और 2025 में आई बाढ़ के दौरान कई इलाकों में गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। प्रशासन का मानना है कि यदि बाढ़ क्षेत्र में आबादी लगातार बढ़ती रही तो भविष्य में जान-माल का नुकसान और अधिक हो सकता है। इसी वजह से नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रखने की बात कही जा रही है। फिलहाल O-Zone में रहने वाले लाखों लोगों की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले समय में यह मुद्दा दिल्ली के सबसे बड़े शहरी और पर्यावरणीय मामलों में से एक बन सकता है।
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