नई दिल्ली : दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा प्राइमरी शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में जातिसूचक शब्द का प्रयोग करके संविधान का खुला उल्लंघन किया गया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बोर्ड ने सामाजिक भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बेहद शर्मिंदा करने वाली हरकत है ये। इस पेपर बनाने वाले को किसने ये काम दिया, प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल क्या इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बावजूद आप डीएसएसएसबी पर कब्जा बनाए हुए है, सिर्फ कब्जा जमाएंगे या कुछ जिम्मेदारी भी लेंगे, सामाजिक भावनाओं व संविधान का खुला उल्लंघन हुआ है।
वहीं इस मामले में समाज कल्याण विभाग मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि कैसे प्रश्न पत्र में ऐसे सवाल पूछे गए। इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि दलित समाज के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। लगातार उनके तरफ से सख्त कार्यवाही करवाने की मांग की जा रही है।
डीएसएसएसबी परीक्षा में जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल
बता दें कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा प्राइमरी शिक्षक के लिए आयोजित परीक्षा के हिंदी भाषा और बोध अनुभाग के प्रश्न में जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया है। डीएसएसएसबी ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा था कि उक्त प्रश्न के अंक नहीं जोड़े जाएंगे। साथ ही भविष्य में ऐसी घटना न हो इसका आश्वासन दिया था।


Download Android App
Download iOS App



