Durgesh Pathak Court Case: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के बाद अब वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक ने भी जज स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट में चल रहे अपने केस की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। बुधवार को दुर्गेेश पाठक ने एक पत्र लिखकर जज स्वर्ण कांता शर्मा को अवगत करा दिया है। पत्र में उन्होंने जोर दिया है कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। उधर, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि हाल के दिनों में कई मामलों की सुनवाई से खुद को अलग करने के बाद जज स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया? आखिर इस मामले में ऐसा क्या अलग है?
बुधवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को लिखे पत्र में दुर्गेश पाठक ने कहा है कि मेरा यह पत्र उपर्युक्त पुनरीक्षण याचिका से संबंधित है, जो वर्तमान में इस न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। मैंने 27 अप्रैल 2026 को अरविंद केजरीवाल द्वारा आपको लिखे पत्र का संज्ञान लिया है और उसे ध्यानपूर्वक पढ़ा है, जिसमें उन्होंने इन कार्यवाहियों में लगातार भाग लेने के संबंध में अपनी अंतरात्मा से जुड़ी आपत्तियां व्यक्त की हैं।
दुर्गेश पाठक ने कहा है कि मैं सम्मानपूर्वक यह बताना चाहता हूं कि मैं उपर्युक्त पत्र में निर्धारित भावनाओं और आशंकाओं से सहमत हूं और मैं उस रुख का पूर्ण समर्थन करता हूं। तदनुसार मैंने भी वर्तमान कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से या कानूनी प्रतिनिधित्व के माध्यम से आगे भाग नहीं लेने का निर्णय लिया है। इस मामले में मेरे पक्ष में दिए गए वकालतनामा को विधिवत रूप से समाप्त माना जाए।


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