CJP Protest : स्वतंत्र महिला पत्रकार रोसी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक पुलिस अधिकारी पर जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह मामला यौन उत्पीड़न की उनकी शिकायत का बदला लेने और उन्हें डराने-धमकाने के मकसद से दर्ज कराया गया है।
याचिका में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दर्ज केस के तहत कोर्ट से गिरफ्तारी और किसी भी कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दिए जाने की अपील की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले को तत्काल सुनने से इनकार करते हुए इस पर शुक्रवार को सुनवाई करने का फैसला किया है।
10 दिन बाद पत्रकार पर दर्ज हुआ केस
याचिका के अनुसार, पत्रकार रोसी ने आरोप लगाया है कि 3 अक्टूबर को बूटा सिंह चौक पर एक प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एसीपी विवेक भगत ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। उन्होंने उसी दिन शाम को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
रोसी का कहना है कि 8 अक्टूबर को पूछताछ और 11 अक्टूबर को घटनास्थल की पहचान समेत पूरा सहयोग करने के बावजूद उनकी शिकायत पर कोई FIR दर्ज नहीं हुई। इसके विपरीत, 13 अक्टूबर की रात एसीपी की शिकायत पर महज 26 मिनट के भीतर उनके खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।
जातिसूचक टिप्पणियों से इनकार
रोसी ने खुद पर लगे जातिसूचक बयानों के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह खुद खासी जनजाति के लिंगदोह समुदाय से आती हैं, जो एक ST के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बता दें, दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक भगत ने रोजी और अन्य दो लोगों (गजेंद्र तथा एक अज्ञात व्यक्ति) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है


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