IIT दिल्ली के M.Sc छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद हुए छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए संस्थान ने बाहरी जांच का ऐलान किया है। निदेशक प्रो. रंजन बनर्जी ने रात 1:07 बजे छात्रों को ईमेल भेजकर इसकी जानकारी दी। निदेशक ने बताया कि उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार और AIIMS के डॉक्टर सहित अन्य सदस्यों की समिति दो हफ्ते में रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही, परिवार को आर्थिक मदद और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए नया तंत्र बनाने की भी घोषणा की गई है।
परिवार को आर्थिक मदद देने की घोषणा
संस्थान ने ऋषिकेश के परिवार को Benevolent Fund से आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से परिवार की मदद के लिए एक अलग Voluntary Fund शुरू किया जाएगा।
छात्रों की मेंटल हेल्थ को मजबूत करने की दिशा में कदम
संस्थान ने छात्रों की उन शिकायतों के समाधान के लिए External Ombudsperson नियुक्त करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे और माता-पिता की निगरानी में रहने वाले छात्रों के लिए Faculty और Student Mentor Support System बनाने की बात कही गई है। साथ ही, निदेशक ने छात्रों से संस्थान की Student Support व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव और सहयोग देने की अपील भी की है।
छात्रों का विरोश प्रदर्शन

IIT दिल्ली में M.Sc फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत से गुस्साए छात्रों ने लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 8:30 बजे शुरू हुआ यह धरना दोपहर तक जारी रहा और बारिश होने पर छात्र अंदर बैठकर भी अपना विरोध जताते रहे। छात्रों ने सोमवार को सभी कक्षाएं पूरी तरह बंद रखने की मांग की और कहा कि एक छात्र की मौत के बाद कैंपस में कामकाज सामान्य नहीं चल सकता। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस पूरे सिस्टम को फिलहाल ‘पॉज’ (PAUSE) यानी रोकने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि छात्र को किन मानसिक और बाहरी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, इसकी पूरी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कैसे हुई थी ऋषिकेश कुमार की मौत?
IIT दिल्ली के M.Sc फिजिक्स के छात्र 31 वर्षीय ऋषिकेश कुमार की शनिवार सुबह IIT दिल्ली के लेक्चर हॉल की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। सुबह 8:33 बजे पुलिस को घटना की जानकारी मिली। उन्हें कैंपस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे और काउंसलिंग ले रहे थे। छात्रों की बैठक में उनकी स्वास्थ्य, पढ़ाई और रहने से जुड़ी परेशानियों का भी जिक्र किया गया था।
मार्च 2026 में हुई मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी
निदेशक रंजन बनर्जी ने बताया कि ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में IIT दिल्ली के MSc Physics कार्यक्रम में एडमिशन लिया था और शिमलिक हॉस्टल में रह रहा था। पहले सेमेस्टर में उसका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, लेकिन मार्च 2026 में मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी के बाद संस्थान के काउंसलर और मनोचिकित्सक ने उन्हें अभिभावकीय निगरानी (Parental Control) में रहने की सलाह दी।
परिवार की निगरानी में रहने की सलाह
इसके बाद उन्होंने दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई छोड़कर अपने परिवार के साथ रहना शुरू किया। जुलाई 2026 में कैंपस लौटने पर मेडिकल जांच के बाद उन्हें फिर से परिवार की निगरानी में रहने की सलाह दी गई। उनका तीसरे सेमेस्टर से नाम वापस लेने का अनुरोध भी मंजूर कर लिया गया। IIT दिल्ली ने उनके इलाज का खर्च देने और परिवार की मदद के लिए फंड देने की घोषणा की है।


Download Android App
Download iOS App




