Jan Vishwas Bill decriminalization India: केंद्र सरकार ने व्यवसायों के लिए नियमों को आसान बनाने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 पेश किया है। यह विधेयक छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए को आपराधिक सजा के बजाय आर्थिक दंड का प्रावधान कर, उद्योग और व्यापार जगत को बड़ी राहत देने का प्रयास करता है।
जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे संसद द्वारा पारित किया गया है, स्वास्थ्य सहित 23 मंत्रालयों के 79 केंद्रीय अधिनियमों में छोटे तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है। इसका उद्देश्य 717 प्रावधानों में कारावास के स्थान पर मौद्रिक जुर्माना लगाकर अनुपालन को सरल बनाना, मुकदमेबाजी कम करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। यह विधेयक 784 जुर्माना लगाकर, प्रावधानों में संशोधन करता है, जिन में 717 अपराधों गैर-आपराधिक बनाया गया है।
ड्रग्स-कॉस्मेटिक्स कानून में बदलाव: छोटे दोष अब अपराध नहीं
यह विधेयक स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में छोटे मोटे, गैर गंभीर उल्लंघनों के लिए कारावास के बजाय मौद्रिक जुर्माना लगाकर अनुपालन को सरल और नागरिक अनुकूल बनाने का एक बड़ा प्रयास है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी संशोधन किया गया है। इस विधेयक के तहत ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 जैसे कानूनों में संशोधन के माध्यम से छोटे नियामक उल्लंघन के लिए आपराधिक दंड के स्थान पर वित्तीय जुर्माने का प्रावधान किया गया है। औषध और प्रसाधन सामग्री से संबंधित कुछ छोटे तकनीकी उल्लंघनों को अब आपराधिक श्रेणी से हटाकर नागरिक दंड में बदल दिया गया है, जिससे कारावास की संभावना खत्म हो गई है।
Jan Vishwas Act 2023 provisions decriminalized: 1000 जुर्म अपराध के दायरे से बाहर
विधेयक का उद्देश्य छोटे अपराधों को हटाकर 1,000 से अधिक अपराधों को तर्कसंगत बनाया गया है, यानी के 1000 से अधिक जर्म अब अपराध के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इन पर जुर्माना लगा कर छोड़ दिया जाएगा। जिससे समग्र नियामक वातावरण में सुधार हो सके और व्यवसायों और नागरिकों दोनों के लिए अधिक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बन सके। जिनमें आजादी के पहले के छह कानून भी शामिल हैं।
सार्वजनिक स्थानों से जुड़े नियम में जो संशोधन किया है उसमें मेट्रो में धूम्रपान, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे ही परिवहन नियमों में बदलाव किया गया है। अब बिना बीमा के वाहन चलाने जैसे मामलों में भी कई स्थितियों में जेल के बजाय जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
कारोबारियों को होगा फायदा…
सरकार को उम्मीद है कि इस विधेयक से देश में निवेश का माहौल बेहतर होगा और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथही, उद्योगों के विस्तार सेरोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक से छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को सबसे ज्यादा फायदा होगा। अक्सर तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूकके कारण उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता था, जिससे उनका समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते थे। नए प्रावधानों से उन्हें राहत मिलेगी और वे अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
विपक्ष की प्रतिक्रिया…
हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक पर कुछ सवाल भी उठाए है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में दंड को कम करना जवाबदेही को कमजोर कर सकता है और नियमों के उल्लंघन को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि जनहित और सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्ती बनी रहे।
सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करने या कचरा फेंकने पर 5000 का जुर्माना
केंद्र सरकार ने नगरपालिका कानूनों में व्यापक बदलाव करते हुए दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में 20 से अधिक बदलाव किए हैं जिसमें जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 में कई छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया है और छोटे आपराधिक प्रावधानों को मौद्रिक दंड में बदला गया है। 10 से अधिक प्रावधान जो पहले जुर्माने के दायरे में आते थे, अब दंड में परिवर्तित कर दिए गए हैं।
उदाहरण के लिए, सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करते हुए या सड़कों पर कचरा फेंककर उपद्रव करते हुए पकड़े जाने पर 500 रुपए का दस गुना जुर्माना देना होगा। गंदगी न हटाने पर, जिसके लिए पहले केवल 50 रुपये का जुर्माना लगता था, अब पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी दी जाएगी और बार-बार उल्लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसी प्रकार, अनधिकृत रूप से सामान बेचना, बिना लाइसेंस के भोजनालय संचालित करना या नगरपालिका अधिकारियों के काम में बाधा डालना जैसी गतिविधियों पर अब अधिक कठोर दंड लगाया जाएगा, जो कुछ मामलों में 1,000 रुपये तक हो सकता है।
रिपोर्ट: सुरेन्द्र पंडित (पंजाब केसरी)
यह भी पढ़ें: सोना हुआ महंगा या सस्ता? 4अप्रैल 2026 के लेटेस्ट Gold- Silver रेट देखें


Download Android App
Download iOS App




