नई दिल्ली : एक दौर वह भी था जब पार्टी के कार्यकर्ता 80 व 90 के दशक में दीवारों पर चढ़कर पोस्टर लगाते थे। लेकिन आज ऐसा लगता है कि कार्यकर्ता पार्टी का प्रवक्ता हो गया है। इसके पीछे बदलते दौर में बदलती टेक्नोलॉजी भी है। यह बाते शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान न्यू ऐज ऑफ कार्यकर्ता किताब के लोकार्पण समारोह के दौरान लेखक डॉ. सुमीत भसीन ने कही। उन्होंने कहा कि मुझे यह किताब लिखने का ख्याल वर्ष 2014 के दौरान आया था।
जब भाजपा ने देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार चुनाव जीत रही थी। हालांकि उन दिनों में छोटे-छोटे आर्टिकल जरूर लिखता था। लेकिन मैंने देखा कि कार्यकर्ता का रोल बदला है। अब वह सिर्फ एक कार्यकर्ता नहीं बल्कि कार्यकर्ता से कहीं ज्यादा हो चला था। भाजपा में शुरुआती दौर में अटल व आडवाणी की जोड़ी ने छाप छोड़ी और अब मोदी और अमित शाह की जोड़ी छाप छोड़ रही है।
किताब को लेकर दिग्गजों ने रखी अपनी बात
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे राज्यसभा सांसद विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि लोगों में यह धारणा बनी हुई है कि कार्यकर्ता नेताओं के चमचे होते हैं, लेकिन यह किताब उन धारणाओं को खत्म करने का काम करेगी। भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि यह पार्टी ने काफी संघर्ष कर यहां तक पहुंची है और 2 सांसदों की पार्टी आज सत्ता में बैठी है। यह सिर्फ कार्यकर्ताओं के दम पर है। केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि बदलते दौर में कार्यकर्ताओं का रोल भी बदला है और मैंने भी अपना राजनीतिक जीवन एक कार्यकर्ता के तौर पर शुरू किया।
पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद महेश गिरि ने कहा कि पार्टी में मेंटर वह होना चाहिए जो कार्यकर्ताओं को सपने दिखाए और कार्यकर्ता को समय-समय पर उसकी ताकत का एहसास कराए। मेंटर और जनप्रतिनिधि को कार्यकर्ता से उसके परिवार का हाल-चाल भी पूछना चाहिए। इससे कार्यकर्ता चलेगा नहीं दौड़ेगा। दक्षिणी दिल्ली से सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि कार्यकर्ता में बहुत ताकत होती है अगर वह कुछ ठान ले तो सबकुछ मुमकिन है। कार्यक्रम का संचालन भाजपा सुशासन प्रकोष्ठ के सदस्य वीरेन्द्र सचदेवा ने किया।


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