Delhi Malviya Nagar Fire : मालवीय नगर के हौजरानी गांव स्थित पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग में विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं, जो अपने परिजनों के इलाज के लिए राजधानी में ठहरे हुए हैं।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मैक्स अस्पताल के आसपास नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे करीब 22 होटलों को खाली करा दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन होटलों में से अधिकांश सुरक्षा और भवन निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। कई प्रतिष्ठानों में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम नहीं पाए गए। प्रशासन ने सभी होटल संचालकों को अगले आदेश तक संचालन बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और नगर निगम की संयुक्त टीमें अब क्षेत्र के सभी होटल, गेस्ट हाउस और रूम स्टे की विस्तृत जांच करेंगी। जिन प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी होटल खाली कराए जा सकते हैं। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि लोगों की जान जोखिम में डालकर किसी भी व्यवसाय को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
हालांकि इस कार्रवाई का सबसे अधिक असर उन मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा है जो मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए दूसरे राज्यों से दिल्ली आए हुए हैं। वर्षों से अस्पताल के आसपास बने होटल मरीजों के तीमारदारों के लिए सहारा बने हुए थे। होटल बंद होने के बाद अब उन्हें गांवों और आसपास के इलाकों में बने छोटे रूम स्टे की तलाश करनी पड़ रही है।
मरीजों के तीमारदारों की बढ़ीं मुश्किलें
आगरा से अपने बेटे के इलाज के लिए आए कृष्णा की परेशानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार दिनों से एक होटल में ठहरे हुए थे, जहां उन्हें दो हजार रुपये प्रतिदिन में कमरा मिल गया था, लेकिन होटल बंद होने के बाद उन्हें हौजरानी गांव के भीतर एक रूम स्टे में कमरा लेना पड़ा। कृष्ण बताते हैं कि कुछ दिन पहले तक जिन कमरों का किराया एक हजार से डेढ़ हजार रुपये प्रतिदिन था, वही अब दो हजार से चार हजार रुपये तक पहुंच गया है।
बढ़ती मांग के कारण खाली कमरे मिलना भी मुश्किल हो गया है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान वे अपने मरीजों को कहीं दूर कहीं ले जा सकते। ऐसे में मजबूरी में उन्हें बढ़े हुए किराए पर भी कमरे लेने पड़ रहे हैं। एक ओर प्रशासन लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों के आसपास ठहरने की व्यवस्था अचानक प्रभावित होने से सैकड़ों परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे हैं। सुरक्षा और मानवीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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