तीन वर्षों में 62 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 30 हजार से ज्यादा मैंग्रोव पौधों का रोपण, पांच तटीय गांवों को जोड़ा गया अभियान से

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Delhi News : भारत सरकार तटीय राज्यों में बाढ़, कटाव और चक्रवातों से निपटने के लिए मैंग्रोव वनों के संरक्षण और रोपण को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। इसके लिए मिष्टी (तटीय आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल) जैसी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो खारे पानी में उगने वाले इन पौधों के जरिए प्राकृतिक तटबंध (बायो-शिल्ड) तैयार करती हैं। इसके तहत 9 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 540 वर्ग किमी क्षेत्र में मैंग्रोव का रोपण किया जा रहा है। मैंग्रोव के पेड़ तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये खारे…

Delhi News : भारत सरकार तटीय राज्यों में बाढ़, कटाव और चक्रवातों से निपटने के लिए मैंग्रोव वनों के संरक्षण और रोपण को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। इसके लिए मिष्टी (तटीय आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल) जैसी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो खारे पानी में उगने वाले इन पौधों के जरिए प्राकृतिक तटबंध (बायो-शिल्ड) तैयार करती हैं।

इसके तहत 9 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 540 वर्ग किमी क्षेत्र में मैंग्रोव का रोपण किया जा रहा है। मैंग्रोव के पेड़ तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये खारे पानी में पनपने वाले पेड़ मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। मैंग्रोव की घनी जड़ें तूफानों, चक्रवातों और सुनामी की लहरों को धीमा करके तटीय क्षेत्रों को बाढ़ और कटाव से बचाती है।

समुद्र में पौधारोपण (विशेषकर मैंग्रोव) कर प्रकृति को समृद्ध, संतुलित और आपदा-मुक्त बनाया जा सकता है। यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका में सुधार करता है। मैंग्रोव वन तूफानों और तेज लहरों को रोककर तटों की रक्षा करते हैं। ये पौधे स्थलीय जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं। खारे पानी में उगने वाले वृक्ष जो तटीय मिट्टी को बांधकर रखते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर पौधे जो पानी को साफ करते हैं और जैव ईंधन या भोजन के काम आते हैं।

 

ग्रामीणों ने कंपनी के प्रतिनिधियों का किया स्वागत

ओडिशा जैसे तटीय राज्यों में स्थानीय लोग पर्यावरण संरक्षण और तट सुरक्षा के लिए मैंग्रोव रोपण कर रहे हैं। प्रकृति संरक्षण को केवल संदेश तक सीमित न रखकर उसे जमीनी स्तर पर अमल में उतारने की दिशा में सिग्नेचर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर ने ओडिशा के तटीय क्षेत्र आस्तरंगा में एक प्रेरणादायक पहल की है। कंपनी की ‘वन विद नेचर’ सोच के तहत चलाए जा रहे मैंग्रोव पुनर्जीवन परियोजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

ओडिशा सरकार के राजस्व विभाग और वन विभाग की मदद से यह मैंग्रोव लगाने का काम किया जा रहा है। गांव के लोगों को शामिल करने के लिए इसमें सबसे पहले ग्राम पंचायत के अध्यक्ष से बात की जाती है। उन्हें पूरा मामला समझने के बाद गांव के लोग इस काम में सहयोग करते हैं। कोणार्क से आस्तरंगा तक की यात्रा के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों का स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। पुष्पवर्षा, तिलक, मालाओं और जनजातीय संगीत के बीच अतिथियों का अभिनंदन किया गया।

 ‘द मैंग्रोव रीजेनेरेशन प्लेज’ के रूप में भी किया गया प्रस्तुत

इसके बाद सभी ने नाव के माध्यम से मैंग्रोव क्षेत्र का दौरा किया और स्वयं पौधारोपण कर संरक्षण के संकल्प को मजबूत किया। सिग्नेचर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की यह तीन वर्षीय सामुदायिक परियोजना ओडिशा के पूर्वी तट पर 62 एकड़ से अधिक क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्जीवन पर केंद्रित है। इस अभियान के तहत अब तक 30 हजार से अधिक मैंग्रोव पौधे लगाए जा चुके हैं और पांच तटीय गांवों को दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों से जोड़ा गया है। कंपनी ने इस पहल को ‘द मैंग्रोव रीजेनेरेशन प्लेज’ के रूप में भी प्रस्तुत किया है।

अभिनेता आयुष्मान खुराना की उपस्थिति वाले इस विशेष अभियान के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, तटीय समुदायों की भूमिका और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे लोगों के योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

मैंग्रोव जंगल वर्षा वनों की तुलना में चार गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं…डियाजियो इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट एवं पोर्टफोलियो हेड-मार्केटिंग आनंदिता दत्ता ने कहा कि मैंग्रोव पुनर्जीवन परियोजना समुदाय आधारित कार्रवाई, निरंतर प्रतिबद्धता और पर्यावरणीय प्रगति का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ‘वन विद नेचर’ के माध्यम से कंपनी उन पारिस्थितिक तंत्रों और लोगों का सम्मान कर रही है, जो प्रकृति की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

चार गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने की क्षमता

विशेषज्ञों के अनुसार मैंग्रोव जंगल वर्षा वनों की तुलना में चार गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं। ये समुद्री जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करने के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों को चक्रवात और समुद्री तूफानों के प्रभाव से भी बचाते हैं। इसके बावजूद देश में इनकी संख्या लगातार घट रही है। यह परियोजना केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों को नर्सरी प्रबंधन, पौधों की देखरेख, निगरानी और संरक्षण गतिविधियों से जोड़कर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।

एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के सहयोग से ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य के संरक्षक के रूप में तैयार किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और आजीविका विकास साथ-साथ चल सकते हैं। इसी सोच के साथ यह पहल ऐसे स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में काम कर रही है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिल सके।

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Avinay