सरकारी दवाओं की कालाबाजारी, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट ने डीडीयू हॉस्पिटल के कर्मचारी समेत पांच दबोचे

Medicine Smuggling Racket Delhi

Medicine Smuggling Racket Delhi: राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत की शिकायत अक्सर सामने आती रहती हैं, जिसके कारण गरीब और जरूरतमंद मरीजों को दर-दर भटकना पड़ता है। सरकार जहां जनता को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं कुछ लालची कर्मचारी और उनके साथी इस व्यवस्था को ही लूटने में लगे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट ने उजागर किया है, जिसमें डीडीयू अस्पताल के कर्मचारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इनकी पहचान पहचान बिनेश कुमार (54), प्रकाश मेहतो, नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से करीब 70 लाख रुपये की सरकारी दवाएं बरामद हुई हैं, जो अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त बांटने के लिए भेजी गई थीं। जांच में सामने आया है कि आरोपी अस्पताल से दवाएं बाहर निकालकर बाजार में बेच देते थे और मोटा मुनाफा कमाते थे। इस खुलासे के बाद साफ हो गया है कि मरीजों को दवाएं न मिलने के पीछे सिर्फ कमी नहीं, बल्कि दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा खेल भी जिम्मेदार है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।

सरकारी अस्पतालों की दवाइयों की कालाबाजारी

डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि आरोपियों को एसीपी गिरीश कौशिक की देखरेख में इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व में सब इस्पेक्टर सरगम ​​भारद्वाज, प्रदीप गोदारा, एएसआई देवेंद्र, संजीव मलिक, हेडकास्टेबल विकास डबास, संदीप और अशोक की टीम ने पकड़ा है। टीम को सूचना मिली कि सरकारी अस्पतालों की दवाइयों की कालाबाजारी की जा रही है। इसके बाद टीम ने गुप्त सूचना के बाद तीनों आरोपी नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया के रूप में हुई। पुलिस ने इनके पास से एक टेंपो और एक कार में दवाओं की एक बड़ी खेप बरामद की।

इन दवाइयों में एंटीबायोटिक और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन सहित कई जरूरी दवाएं भी शामिल थी। इन दवाइयों पर नोट फोर सेल लिखा हुआ था। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी पिछले 1 से 1.5 साल से बिचौलियों की मदद से अवैध आपूर्ति नेटवर्क को चला रहे थे। इसके बाद पुलिस ने इनकी निशानदेही पर दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान डीडीयू अस्पताल के फार्मासिस्ट बिनेश कुमार (54) और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी प्रकाश मेहतो के रूप में हुई। जांच में पुलिस को पता चला कि ये दोनों रिकॉर्ड में हेरफेर करके अस्पताल के स्टॉक से दवाएं निकालकर उन्हें गैर-कानूनी बिक्री के लिए भेजने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

दिल्ली पुलिस ने बड़ी मात्रा में दवाई ले जाते दबोचा

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गत दो अप्रैल को टीम ने तीस हजारी स्थित जय भारत ट्रांसपोर्ट, राजेंद्र मार्केट में छापा मारा और तीन आरोपी नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को एक टेंपो और कार में बड़ी मात्रा में दवाएं ले जाते हुए दबोच लिया गया। आगे पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपी नीरज कुमार सहारनपुर में आदित्य फार्मेसी के नाम से दवा का थोक कारोबार करता है और दिल्ली से अवैध रूप से दवाएं खरीदकर ब्रोकरों के जरिए अन्य शहरों में सप्लाई करता था। सुशील कुमार टैक्सी चालक के रूप में इन दवाओं के परिवहन में मदद करता था, जबकि लक्ष्मण मुखिया टेंपो के जरिए बड़ी खेप को ट्रांसपोर्ट हब तक पहुंचाता था। बरामद दवाओं में एंटीबायोटिक और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन जैसे सेफीक्सीम, अमोक्सिसिल्लिन, मेरोपेनेम, सेफ्ट्राइएक्सोन, रेबीज एंटीसिरम सहित कई महंगी दवाएं शामिल हैं।

दिल्ली सरकार के कई अस्पतालों में दवाओं की किल्लत

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अक्सर दवाओं की किल्लत की फाइलें सामने आती रहती हैं, जिससे मरीजों को काफी मरीजों का सामना करना पड़ता है। खासकर लोक नायक अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल और बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल सहित कई अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। दवा न मिलने के कारण मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई बार डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे इलाज भी प्रभावित होता है। यही कारण है कि सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था पर समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं।

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