Paramedical Training Reforms: देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स दिल्ली में एलाइड और हेल्थकेयर (पैरामेडिकल) शिक्षा को विस्तार देने के लिए संसद की एक स्थायी समिति ने कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। समिति ने संस्थान से इस क्षेत्र के लिए एक समर्पित स्कूल स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है, ताकि बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को पूरा किया जा सके। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर स्थायी समिति द्वारा संसद में पेश रिपोर्ट, जिसकी अध्यक्षता राम गोपाल यादव कर रहे हैं, में कहा गया है कि प्रशिक्षित एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
इसके बावजूद एम्स दिल्ली में अभी तक इस क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र शैक्षणिक केंद्र स्थापित नहीं किया गया है, जबकि नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन एक्ट, 2021 लागू होने के बाद कई नए एम्स संस्थानों में ऐसे ढांचे विकसित हो चुके हैं। समिति का मानना है कि एम्स दिल्ली में एलाइड हेल्थ साइंसेज के लिए विशेष स्कूल की स्थापना से न केवल मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार होंगे। वर्तमान में एम्स में मेडिकल रेडियोलॉजी, डेंटल हाइजीन, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी जैसे कई पैरामेडिकल कोर्स संचालित हो रहे हैं, लेकिन एकीकृत ढांचे की कमी महसूस की जा रही है।
नर्सिंग शिक्षा के विस्तार पर विशेष जोर
समिति ने नर्सिंग शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए भी कई अहम सुझाव दिए हैं। एम्स नर्स यूनियन के साथ चर्चा के बाद यह सिफारिश की गई कि नर्सिंग में शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएं और क्लिनिकल नर्सिंग ट्रेनिंग लैब तथा आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल जैसे बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न क्लिनिकल शाखाओं में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने से नर्सिंग स्टाफ को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। इससे मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता में सीधा सुधार होगा और नर्सों के पेशेवर विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
सस्ती और समावेशी नर्सिंग शिक्षा की जरूरत
समिति ने नर्सिंग शिक्षा की बढ़ती लागत और क्षेत्रीय असमानताओं पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इसे अधिक सुलभ बनाने की अपील की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को सुझाव दिया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, आरक्षण और वित्तीय सहायता की व्यवस्था की जाए। साथ ही ग्रामीण, आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में नए नर्सिंग कॉलेज खोलने पर भी जोर दिया गया है।
एमबीबीएस छात्रों को राहत देने का प्रस्ताव
मेडिकल शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण सुझाव में समिति ने एमबीबीएस के पहले प्रोफेशनल परीक्षा को पास करने के लिए अधिकतम प्रयासों की संख्या चार से बढ़ाकर छह करने की सिफारिश की है। साथ ही पूरा कोर्स दस साल में पूरा करने की सीमा तय करने का भी सुझाव दिया गया है।
समिति का मानना है कि एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे कठिन विषयों को देखते हुए मौजूदा चार प्रयासों की सीमा कई छात्रों के लिए कठोर साबित हो रही है। ऐसे में यह बदलाव छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करेगा।
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