दिल्ली उच्च न्यायालय ने खेल मंत्रालय को राष्ट्रीय योगासन क्रीड़ा संघ (एनवाईएसएफ) की मान्यता को लेकर सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद 2011 की खेल संहिता के अनुसार नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मंत्रालय को एनवाईएसएफ को पहले ही प्रदान की जा चुकी मान्यता से प्रभावित हुए बिना कोई निर्णय लेने का निर्देश देते हुए कहा कि वह खेल संहिता के तहत मान्यता प्रदान करने के लिये उचित प्राधिकरण है।
अदालत ने देश में योगासन को बढ़ावा देने के लिये पिछले साल 27 नवंबर को एनवाईएसएफ को मान्यता दिये जाने के खिलाफ भारतीय योग संघ (वाईएफआई) के प्रतिवेदन पर मंत्रालय को 22 अप्रैल के बाद 45 दिन के अंदर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
सरकार ने दोनों संघों की दलीलें सुनने के बाद राष्ट्रीय खेल संहिता 2011 के अनुसार उचित निर्णय लेने का आदेश दिया और मामले की सुनवाई 27 अगस्त तक के लिये स्थगित कर दी। वाईएफआई ने एनवाईएसएफ को मान्यता दिये जाने को इस आधार पर चुनौती थी कि ऐसा आयुष मंत्रालय की सिफारिशों पर किया गया और यह निर्णय खेल संहिता के विरुद्ध है।
वाईएफआई का कहना है कि केवल खेल मंत्रालय ही खेल संहिता के अनुसार किसी खेल निकाय को मान्यता देने पर निर्णय ले सकता है तथा किसी अन्य मंत्रालय या विभाग की सिफारिशों के आधार पर ऐसा नहीं किया जा सकता।


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