NDMC के पार्कों में जल्द होगा 100 फीसदी जैविक खाद का इस्तेमाल

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NDMC News  : नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने अपने पार्कों और बगीचों में जल्द से जल्द 100 फीसदी जैविक खाद के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के साथ गीले और बागवानी कचरे को स्थानीय स्तर पर खाद में बदलने पर जोर दिया जाएगा। मंगलवार को एनडीएमसी अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने पालिका केंद्र में कर्मचारियों और बागवानी विभाग को जैविक खाद वितरित की। इसके साथ ही खाद से भरे तीन ट्रकों को पार्कों और बगीचों के लिए रवाना किया गया। एनडीएमसी के अनुसार चाणक्यपुरी के मधु लिमये मार्ग स्थित जैविक खाद…

NDMC News  : नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने अपने पार्कों और बगीचों में जल्द से जल्द 100 फीसदी जैविक खाद के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के साथ गीले और बागवानी कचरे को स्थानीय स्तर पर खाद में बदलने पर जोर दिया जाएगा।

मंगलवार को एनडीएमसी अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने पालिका केंद्र में कर्मचारियों और बागवानी विभाग को जैविक खाद वितरित की। इसके साथ ही खाद से भरे तीन ट्रकों को पार्कों और बगीचों के लिए रवाना किया गया। एनडीएमसी के अनुसार चाणक्यपुरी के मधु लिमये मार्ग स्थित जैविक खाद सुविधा केंद्र में पिछले एक साल के दौरान करीब 10 हजार किलोग्राम खाद तैयार की गई है। इसे एनडीएमसी क्षेत्र से निकलने वाले गीले और बागवानी कचरे से बनाया गया है। स्थानीय स्तर पर कचरे का निस्तारण होने से उसे दूर स्थित प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत भी कम होती है।

अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि जैविक खाद वितरण की इस पहल को अब रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) तक पहुंचाया जाएगा, ताकि लोग घरों के गमलों और नर्सरी में भी इसका इस्तेमाल कर सकें। परिषद का उद्देश्य धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए कचरे से खाद और फिर हरियाली का पूरा चक्र तैयार करना है। एनडीएमसी ने जैविक कचरे के विकेंद्रीकृत निस्तारण के लिए अपने क्षेत्र में 79 कम्पोस्टिंग केंद्र विकसित किए हैं। इनमें करीब 15 टन प्रतिदिन क्षमता वाले 46 कम्पोस्ट पिट, 10 टन क्षमता वाले 27 ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर और पांच टन क्षमता वाले पांच कम्युनिटी कम्पोस्टर शामिल हैं। इसके अलावा ओखला में 60 टन प्रतिदिन क्षमता की एक वेस्ट-टू-कम्पोस्ट सुविधा मौजूद है। रिहायशी इलाकों सहित विभिन्न स्थानों पर करीब 110 एरोबिन भी लगाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 45 मीट्रिक टन है।

इनके माध्यम से रसोई से निकलने वाले छिलके, फल-सब्जियों के अवशेष और अन्य जैविक कचरे को खाद में बदला जाता है। एनडीएमसी क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 80 से 100 टन बागवानी और हरित कचरा निकलता है। मधु लिमये मार्ग के अलावा सांगली मेस, राजा बाजार, न्यू मोती बाग और भारती नगर सहित कई क्षेत्रों में कम्पोस्टिंग की व्यवस्था की गई है। द्विवेदी ने नागरिकों से घर पर ही गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरा अलग-अलग रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्रोत पर कचरे को अलग करने और स्थानीय स्तर पर उसके प्रसंस्करण से लैंडफिल पर बोझ घटाने के साथ परिवहन से होने वाले प्रदूषण को भी कम किया जा सकेगा।

Sumant Chaudhary