दिल्ली की एक अदालत ने फ्रांस की कंपनी एयरबस इंडस्ट्री के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष के खिलाफ धनशोधन से जुड़े एक मामले में शुक्रवार को बेमियादी गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया।
यह मामला 2005 में एयरबस इंडस्ट्री से तत्कालीन कंपनी इंडियन एयरलाइंस द्वारा 43 विमानों की खरीद से जुड़ा हुआ है। इंडियन एयरलाइंस का एयर इंडिया में विलय हो चुका है।
यह मामला कथित रूप से विदेशी निजी एयरलाइनों को फायदा पहुंचाने वाली बातचीत से संबंधित है जिससे एयरलाइन को नुकसान हुआ था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान को बताया कि एयरबस इंडस्ट्री के तत्कालीन उपाध्यक्ष (मूल्य निर्धारण और विपणन) ब्रिटिश नागरिक किरण राव ने ‘‘जानबूझकर’’ समन की अवहेलना की और जांच के लिए पेश नहीं हुए। उसने कहा कि राव ‘‘सहयोग नहीं कर रहे है और जांच को प्रभावित किया है।’’
ईडी की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक नीतेश राणा ने अदालत को बताया कि इंडियन एयरलाइन्स द्वारा एयरबस इंडस्ट्री से 43 विमानों की खरीद के लिए छह सितम्बर, 2005 को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह द्वारा एयरबस इंडस्ट्री की ओर से राव और अन्य के साथ बातचीत की गई थी।
उन्होंने बताया कि राव जांच से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं। अदालत ने इससे पूर्व ईडी को इस मामले में बिचौलिये दीपक तलवार से पूछताछ करने की अनुमति दी थी। वह धनशोधन के एक अन्य मामले में पहले से ही तिहाड़ जेल में है।
ईडी के वकील ए आर आदित्य ने कहा कि इंडियन एयरलाइन्स के अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया गया था कि अधिकारी एयरबस इंडस्ट्री के साथ षडयंत्र में शामिल थे जिसके कारण फ्रांस की फर्म को ‘‘अनुचित आर्थिक लाभ’’ हुआ और 43 विमानों की खरीद में सरकारी खजाने को नुकसान हुआ था।
एक अन्य मामले में ईडी ने आरोप लगाया था कि तलवार ने विदेशी निजी एयरलाइन्स के पक्ष में बातचीत के लिए बिचौलिये के रूप में काम किया जिसके कारण एयर इंडिया को नुकसान हुआ।


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