दिल्ली एसीबी की बड़ी कार्रवाई: प्रतिभा विकास योजना की आड़ में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश

Summary :

Pratibha Vikas Yojana Scam: दिल्ली में आम आदमी ‘आप’ सरकार की गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने की योजना से जुड़े मामले में 37.20 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने दिल्ली में कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसीपी अधिकारी के मुताबिक इस भ्रष्टाचार के संबंध में दिल्ली के तत्कालीन एलजी वीके सक्सेना के निर्देश पर एसीबी ने जांच शुरू की। बाद में एससी,एसटी व ओबीसी वेलफेयर की शिकायत पर एसीबी ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। करीब आठ माह जांच…

Pratibha Vikas Yojana Scam: दिल्ली में आम आदमी ‘आप’ सरकार की गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने की योजना से जुड़े मामले में 37.20 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने दिल्ली में कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसीपी अधिकारी के मुताबिक इस भ्रष्टाचार के संबंध में दिल्ली के तत्कालीन एलजी वीके सक्सेना के निर्देश पर एसीबी ने जांच शुरू की। बाद में एससी,एसटी व ओबीसी वेलफेयर की शिकायत पर एसीबी ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। करीब आठ माह जांच के बाद एसीबी ने इस मामले में रविंद्र सिंह, संजीव, आजाद कलेट, हर्षित, नरेंद्र कुमार गुप्ता, शुभम शरण, संजय कुमार, जितेंद्र कुमार और कंवर दिग्विजय सिंह को गिरफ्तार किया है।

ज्वाइंट सीपी (एसीबी) विक्रमजीत सिंह के मुताबिक तफ्तीश के दौरान ट्यूशन सेंटरों के मालिकों, निदेशकों व संचालकों को अपना पक्ष रखने और ठोस रूप से समझाने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके। यहां तक ​​कि कुछ संस्थानों ने एफआईआर दर्ज होने के बाद छात्रों के खातों में वजीफा स्थानांतरित किया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक डीएससीएसटी को इंस्टीट्यूट द्वारा दिए गए इनकम सर्टिफिकेट और कास्ट सर्टिफिकेट को भी रेवेन्यू अथॉरिटी से वेरीफाई किया जा रहा है। दूसरे इंस्टीट्यूट और एससी-एसटी डिपार्टमेंट के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है। सूत्रों की मानें अभी तक की जांच में ऐसे 700 से अधिक ऐसे छात्रों के दस्तावेज मिले हैं, जिन्होंने इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की ही नहीं। वे सिर्फ पूछताछ के लिए इंस्टीट्यूट गए थे। मगर इंस्टीट्यूट द्वारा उनके दस्तावेज गलत इस्तेमाल किया गया।

ओबीसी वेलफेयर की शिकायत हुआ था केस दर्ज

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बीते वर्ष सात अगस्त को एससी-एसटी व ओबीसी वेलफेयर की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) में एफआईआर संख्या 38/2025 दर्ज की गई। आरोप था कि अलग-अलग पैनल वाले कोचिंग इंस्टिट्यूट ने 2018-19 में ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ के तहत सरकारी खजाने से पैसे मांगने के लिए गैर-कानूनी काम किए। एसीपी (एसीबी) जरनैल सिंह की देखरेख में एक टीम ने जांच शुरू कर दी। टीम को तफ्तीश के दौरान पता चला कि यह योजना 2017 में कैबिनेट डिसीजन के बाद शुरू की गई थी। नोटिफिकेशन नौ जनवरी 2018 को जारी हुआ। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एससी वर्ग के छात्रों को कोचिंग प्रदान करने के लिए आठ संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया था। पहले चरण में लगभग पांच हजार छात्रों ने दाखिला लिया था। संस्थान के लिए कोचिंग शुल्क और छात्र के लिए वजीफा एससी और एसटी विभाग द्वारा संस्थान को दिया जाना था।

वर्ष 2019-20 में इस योजना में एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस श्रेणियों को जोड़ते हुए फिर से शुरू किया गया। इस बार 38 और संस्थानों को इसके लिए सूचीबद्ध किया। इन दोनों चरणों में लगभग 22 हजार छात्रों ने दाखिला लिया था। मगर इसमें धांधली और फर्जीवाड़ा करते हुए इन संस्थानों ने उक्त योजना के तहत सरकारी खजाने से 37.20 करोड़ रुपये प्राप्त कर लिए। जबकि संस्थानों को इस योजना के लिए एक अलग बैंक खाता बनाए रखना अनिवार्य था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। जांच में ऐसे छात्र भी मिले जिन्होंने किसी संस्थान में प्रवेश नहीं लिया था, मगर छात्रों के प्रवेश संबंध जाली दस्तावेज तैयार किए गए। जिसके बाद इन छात्रों के नाम पर सरकार से धन का दावा किया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि कई मामलों में संस्थानों द्वारा प्राप्त वजीफा राशि छात्रों को वितरित ही नहीं की गई। इतना ही नहीं कुछ संस्थानों ने तो अपने छात्रों को कोचिंग के लिए स्थानीय ट्यूशन सेंटरों में भेज दिया ,जो कि एक बड़ा उल्लंघन था।

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल

करोड़ों की धोखाधड़ी में पुलिस ने मुखर्जी नगर में रवींद्र इंस्टीट्यूट के निदेशक रविंद्र सिंह, रविंद्र इंस्टीट्यूट का काम संभाल रहे संजय कुमार, रोहिणी में तक्षशिला इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर नरेंद्र कुमार गुप्ता, मुखर्जी नगर में किरण इंस्टीट्यूट के निदेशक शंभू शरण और मुखर्जी नगर में परिणाम इंस्टीट्यूट के निदेशक दिग्विजय कुमार को गिरफ्तार किया है। रविंद्र इंस्टीट्यूट के निदेशक ने तीन अन्य ट्यूशन सेंटर संचालकों को इस योजना के तहत पढ़ाने का ठेका दे दिया। इन तीनों ट्यूशन सेंटर के मालिकों (करावल नगर के तक्षशिला ट्यूशन सेंटर के मालिक आजाद कलेट, यमुना विहार के मोमेंटम ट्यूशन सेंटर के मालिक हर्षित और कर्दमपुरी के प्रयास कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक संजीव कुमार) को भी गिरफ्तार कर लिया। सरकार ने रोहिणी स्थित एनजीओ ‘पहल’ को इस योजना को बांटने का काम दिया था, मगर एनजीओ ने भी अवैध तरीके से छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया। एसीबी ने निदेशक जितेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया है।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।