सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एक छात्र को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में अपने परिवार के पास जाने की बुधवार को अनुमति दे दी। न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस छात्र को समुचित सुरक्षा प्रदान करे।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने छात्र मोहम्म्द अलीम सैयद को अनंतनाग में अपने परिवार से मिलकर लौटने के बाद न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने पुलिस को इस छात्र को समुचित सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े से कहा कि यदि यह छात्र बृहस्पतिवार को अनंतनाग जाना चाहता है तो न्यायालय का आदेश उसे एक घंटे मे उपलब्ध करा दिया जायेगा। अधिवक्ता मृगांक प्रभाकर के माध्यम से दायर याचिका में सैयद ने कहा है कि वह अनंतनाग का स्थाई निवासी है और चार-पांच अगस्त से उसे अपने माता पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
उसने याचिका में संदेह व्यक्त कि शायद उसके माता-पिता को कश्मीर में नजरबंद कर लिया गया है क्योंकि वह उनसे अभी तक किसी भी तरह से संपर्क कायम नहीं कर सका है। सैयद ने अपनी याचिका में कहा कि राष्ट्रपति का आदेश जारी होने के बाद से वहां इंटरनेट और फोन सेवा पूरी तरह बंद है। उसने यह भी दलील दी है कि सूचना का ब्लैक आउट और लोगों के आवागमन पर प्रतिबंध संविधान में प्रदत्त् मौलिक अधिकारों का हनन करता है।


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