World Elephant Day : विश्व हाथी दिवस के मौके पर, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (आईएनटीएसीएच) ने ‘प्रोजेक्ट गज-लोक’ के तहत डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म ‘गज लोक: वाइल्ड, सेक्रेड, इटरनल’ को रिलीज करने के साथ साथ इसकी स्क्रीनिंग की। फिल्म में सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, पारिस्थितिकी जैसे आपस में जुड़े पहलुओं के जरिए एशियाई हाथी के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते को दिखाया गया है। इस अवसर पर आईएनटीएसीएच के चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर ने मुख्य अतिथि टिम कर्टिस (निदेशक और प्रतिनिधि, यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय, दक्षिण एशिया) और विशेष अतिथि के. एन. श्रीवास्तव, आईएएस (रिटायर्ड) (निदेशक, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर) का स्वागत किया।
इस अवसर पर आईएनटीएसीएच के सदस्य सचिव रवींद्र सिंह, आईएएस (रिटायर्ड) ने ‘गज-लोक’ प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी और आईएनटीएसीएच के ‘इंटैंजिबल कल्चरल हेरिटेज डिवीन’ की प्रिंसिपल डायरेक्टर नेरुपमा वाई. मोडवेल ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर फिल्ममेकर हिमांशु जोशी और कपिल बत्रा के रचनात्मक योगदान को भी सराहा गया, जिनकी स्क्रिप्ट, नैरेशन और डायरेक्शन ने इस डॉक्यूमेंट्री को आकार दिया।
टिम कर्टिस ने ‘गज-लोक’ पहल और डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सराहना की
इस अवसर पर अपने संबोधन में टिम कर्टिस ने ‘गज-लोक’ पहल और डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सराहना की और हाथी से जुड़ी विरासत के सांस्कृतिक और पारिस्थितिक पहलुओं को उजागर करने के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने प्रकृति और संस्कृति के रिश्ते के महत्व पर भी प्रकाश डाला। वहीं, के. एन. श्रीवास्तव ने डॉक्यूमेंट्री की तारीफ करते हुए कहा कि इसने हाथियों से जुड़ी विरासत के सांस्कृतिक और पारिस्थितिक पहलुओं को एक दिलचस्प और आसानी से समझ आने वाले रूप में पेश किया है।
क्या है प्रोजेक्ट गज-लोक ?
बता दें कि इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। साथ ही, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ इस प्रोजेक्ट का संस्थागत भागीदार है। यह डॉक्यूमेंट्री ‘प्रोजेक्ट गज-लोक’ का एक अहम हिस्सा है। आईएनटीएसीएच की इस पहल का मकसद पूरे भारत और एशिया में हाथियों के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व को समझना है।



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