Sewage Treatment Plant: कई सालों की उपेक्षा और कचरा फेंकने के बाद, दक्षिण दिल्ली का तेरहवीं शताब्दी का ऐतिहासिक जल भंडार हौज-ए-शम्सी अब नए जीवन की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली सरकार ने इसे स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए वसंत कुंज सेक्टर ए में 4.5 मिलियन लीटर प्रति दिन की क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारीयों ने बताया कि STP का निर्माण 750 वर्ग मीटर भूमि पर किया जाएगा, इसके लिए लगभग 35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कुल लागत में से 15.66 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) द्वारा प्रदान किए जाएंगे, बाकि के 20.17 करोड़ रुपये परिचालन और रखरखाव के लिए दिल्ली सरकार खर्च करेगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू

अधिकारियों ने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निविदा काम शुरू हो गया है। यह प्लांट ‘डिज़ाइन, निर्माण और संचालन’ (DBO) मॉडल पर बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि जो कंपनी इसे बनाएगी, वही अगले 15 साल तक इसका संचालन भी संभालेगी। निविदा प्रक्रिया फरवरी तक पूरी हो जाएगी और निर्माण में लगभग एक साल लगेगा। प्लांट चालू करने में इसके बाद तीन महीने और लगेंगे। अधिकारी ने यह भी बताया कि निर्माण करने वाली कंपनी प्लांट के लिए सबसे सही जल उपचार तकनीक चुन सकेगी।
Hauz-i-Shamsi: लोगों ने की जलाशय दूषित होने की शिकायत

पिछले दस साल से आसपास के लोग जलाशय के दूषित होने की शिकायत कर रहे हैं। इसका कारण पानी का रिसाव, कीचड़ का जमाव और किनारों पर कचरा फेंका जाना है। जलाशय की पुरानी लाल बलुआ पत्थर की संरचना भी अब टूट-फूट वाली नजर आती है।
अधिकारियों के अनुसार, नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इन समस्याओं को दूर करेगा। यह न केवल ताजे और साफ पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि जलाशय में पानी के ठहराव और गंदगी को भी रोकने में मदद करेगा।
13वीं शताब्दी में हुआ जलाशय का निर्माण
अधिकारियों ने बताया कि ASI द्वारा संरक्षित इस जलाशय का निर्माण 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने करवाया था। दिल्ली में निर्मित धरोहरों की INTACH सूची के अनुसार, शम्सी तालाब के नाम से भी प्रसिद्ध यह जलाशय कभी 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ था। हालांकि, ASI के अनुसार, अब यह घटकर लगभग 7.05 एकड़ रह गया है।
Delhi Government: पहले भी हुआ जलाशय की सफाई का प्रयास
इससे पहले, 2015 में एएसआई ने जलाशय की सफाई का प्रयास किया था, लेकिन उसे बहुत कम सफलता मिली थी। 2024 और 2025 में, सस्टेनेबल एनवायरनमेंट एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट सोसाइटी (एसईईडीएस) ने एएसआई की देखरेख में फिर से इस स्थल पर स्वच्छता अभियान चलाया।
इल्तुतमिश का जलाशय: सपने और इतिहास का संगम

एक तरफ 12 पत्थर के स्तंभों पर टिके गुंबदनुमा मंडप और दूसरी तरफ जहाज़ महल से घिरा यह जलाशय इल्तुतमिश द्वारा बनवाया गया था। यह जानकारी 1922 में एएसआई के तत्कालीन अधीक्षक पुरातत्वविद् मौलवी ज़फ़र हसन द्वारा लिखित ‘मुहम्मदन और हिंदू स्मारकों की सूची, महरौली ज़ैल, खंड III’ में मिलती है। इल्तुतमिश को सपने में घोड़े पर सवार एक पैगंबर दिखाई दिए, जिसके कारण वे उस स्थान पर पहुंचे, जहां आज यह जलाशय स्थित है।
इस घटना के बाद, इल्तुतमिश को उसी स्थान पर घोड़े के खुरों के निशान मिले, जो उनके सपने में दिखाई दिए थे और संयोगवश वह स्थान पानी का एक प्राकृतिक स्रोत भी था। उसी समय पैगंबर के घोड़े के खुरों के निशान पर ही मंडप का निर्माण किया गया था। जलाशय के उत्तर-पूर्वी कोने पर स्थित जहाज़ महल का निर्माण लोधी काल में हुआ था।
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