World Suicide Prevention Day : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर मानसिक रोगों के उपचार के लिए प्रसिद्ध दिल्ली सरकार के मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) में नुक्कड नाटकों के माध्यम से शानदार प्रस्तुतियां देकर आत्महत्या की प्रवृत्ति को समय पर समझने व इसके रोकथाम के उपाय बताए गये। इस दौरान अस्पताल के विशेषज्ञों ने भी इस गंभीर सामाजिक समस्या पर अपने विचार रखे।
इहबास के डायरेक्टर राजेन्द्र कुमार धमीजा ने बताया कि इस साल की थीम, ‘आत्महत्या के बारे में सोच बदलना’, इस बात पर जोर देती है कि आत्महत्या से जुड़े कलंक और चुप्पी की जगह समझ, उम्मीद और समय पर मदद लेने की भावना को अपनाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि आत्महत्या से पहले कई संकेत मिलते हैं जिनको समझना जरुरी है। इनमें खोए-खोए रहना, नकारात्मक बातें करना,लोगों के बीच रहकर भी खुश न रहना,अपने आप को निर्थकर समझना,हीन भावना से ग्रसित होना, क्रोधी स्वभाव लाना व नकारात्मक स्थिति में मरने की चर्चा करना आदि शामिल हैं।
वहीं इहबास के प्रो. डॉ. ओम प्रकाश,वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं विभागाध्यक्ष जिरियाट्रिक साइकेट्री ने बताया कि आत्महत्या एक पब्लिक हेल्थ से जुड़ी बड़ी समस्या है, जिसके लक्षणों को समय पर समझकर रोका जा सकता है इसीलिए संभावित आत्महत्या के जोखिम के संकेतों को समय पर पहचाना जरुरी है। उन्होंने कहा कि परेशान व्यक्ति के पास जाकर उसकी बातों को सहानुभूति पूर्वक सुनना चाहिए। अगर किसी को आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या वह बहुत ज्यादा मानसिक परेशानी महसूस कर रहा है, तो उन्हें तुरंत मदद लेनी चाहिए।
इसके लिए भारत सरकार की चौबीस घंटे कार्यरत टेली मानस हेल्पलाइन से 14416 या 1-800-891-4416 पर संपर्क करके सलाह लेनी चाहिए। इतना ही नहीं नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाकर उपचार शुरु कराना चाहिए। डॉ. ओमप्रकाश ने स्पष्ट रूप से कहा कि आत्महत्या के विचारों से प्रेरित व्यक्ति को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।


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