भारत की चिकित्सा विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत: प्रो. एम. श्रीनिवास

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हैदराबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम श्रीनिवास ने शुक्रवार को आयुष मंत्रालय के तहत संचालित सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (सीसीआरएएस) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज (एनआईआईएमएच) हैदराबाद का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने और संस्थान को वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रो. श्रीनिवास के साथ नीति आयोग के ओएसडी (स्वास्थ्य) डॉ. शोभित कुमार और यंग प्रोफेशनल डॉ. जानवी प्रजापति भी मौजूद थे। इस अवसर पर सीसीआरएएस के उप महानिदेशक…

हैदराबाद, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम श्रीनिवास ने शुक्रवार को आयुष मंत्रालय के तहत संचालित सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (सीसीआरएएस) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज (एनआईआईएमएच) हैदराबाद का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने और संस्थान को वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रो. श्रीनिवास के साथ नीति आयोग के ओएसडी (स्वास्थ्य) डॉ. शोभित कुमार और यंग प्रोफेशनल डॉ. जानवी प्रजापति भी मौजूद थे।

इस अवसर पर सीसीआरएएस के उप महानिदेशक डॉ. एन श्रीकांत ने उनका स्वागत किया और संस्थान की विभिन्न पहलों, डिजिटल पोर्टलों, रिपॉजिटरी तथा भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े ऐतिहासिक शोध कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने भारत की चिकित्सा विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण में एनआईआईएमएच की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।

वहीं, एनआईआईएमएच के प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने संस्थान की गतिविधियों, प्रमुख उपलब्धियों और महत्वपूर्ण पड़ावों की विस्तृत जानकारी दी।

दौरे के दौरान प्रो. श्रीनिवास ने संस्थान के संग्रहालय, पुस्तकालय और शोध प्रभागों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों और परियोजना कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने एसएएचआई परियोजना के तहत विकसित ‘अगल्या’ और रानी रुद्रमादेवी शिलालेख पर आधारित एक वृत्तचित्र भी देखा।

प्रो. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, ऐतिहासिक वैज्ञानिक अभिलेखों के संरक्षण तथा उन्नत सूचना प्रणालियों और शोध पोर्टलों के माध्यम से भारत की चिकित्सा विरासत को सुरक्षित रखने के लिए सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने संग्रहालय के संरक्षण और रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रक्रियाओं और मानकों को अपनाने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने चिकित्सा विरासत संरक्षण के क्षेत्र में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम और संयुक्त पोस्ट-डॉक्टोरल कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।

प्रो. श्रीनिवास ने एनआईआईएमएच को चिकित्सा तथा संबद्ध विषयों के छात्रों और पेशेवरों के लिए शैक्षणिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि संस्थान की दृश्यता बढ़ाने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि एनआईआईएमएच को नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन और नेशनल मेडिकल कमीशन जैसे नियामक निकायों के साथ मिलकर छात्रों और शिक्षकों से जुड़ना चाहिए। इसके अलावा, भारतीय चिकित्सा विरासत के व्यापक प्रसार के लिए आईआईटी तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में लघु संग्रहालय विकसित किए जाने चाहिए।

प्रो. श्रीनिवास ने भारत की चिकित्सा विरासत के संरक्षण के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए भविष्य में इसकी गतिविधियों को और मजबूत करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

आगंतुक पुस्तिका में उन्होंने एनआईआईएमएच को भारत के समृद्ध चिकित्सा इतिहास को संरक्षित करने वाला एक ‘मंदिर’ बताया और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखने में संस्थान के नेतृत्व और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना की।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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IANS Agency

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