केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली के उपराज्यपाल के अधिकारों में बढ़ोतरी वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इसके तहत उपराज्यपाल को विधानसभा से अलग कुछ फैसलों पर अधिकार होगा और राज्य सरकार को उनकी मंजूरी लेनी होगी। केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले ने केंद्र बनाम राज्य की जंग छेड़ दी है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस संबंध में बीजेपी पर हमला किया।
सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि केंद्र सरकार ने गोपनीय तरीके से दिल्ली सरकार के अधिकार छीन कर LG को दे दिए है। केंद्र सरकार ने GNCTD Act में बदलाव कर दिल्ली की चुनी हुई सरकार के अधिकार कम किए। एलजी को शक्तियां देने का मतलब है कि इसे केंद्र और बीजेपी को सौंपना।ये लोकतंत्र के खिलाफ हैं, संविधान के खिलाफ हैं।
केंद्र सरकार ने गोपनीय तरीके से दिल्ली सरकार के अधिकार छीन कर LG को दे दिए है।
केंद्र सरकारने GNCTD Act में बदलाव कर दिल्ली की चुनी हुई सरकार के अधिकार कम किये।
ये लोकतंत्र के खिलाफ हैं, संविधान के खिलाफ हैं : Dy CM @msisodia pic.twitter.com/B2JsMhr9vi
— AAP (@AamAadmiParty) February 4, 2021
उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने आरोप लगाया कि केंद्र का फैसला संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी कहता है कि सिर्फ तीन मसलों को छोड़कर बाकी सभी निर्णय दिल्ली की राज्य सरकार ले सकती है। लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी दरकिनार कर दिया है।
केंद्रीय कैबिनेट के नए संशोधन के मुताबिक, अब विधायी प्रस्ताव LG के पास कम से कम 15 दिन पहले और प्रशासनिक प्रस्ताव सात दिन पहले पहुंचाने होंगे। गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते दिल्ली के उपराज्यपाल को कई अधिकार मिले हुए हैं।


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