राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति के अंगरक्षक को सम्मानित किया, सिल्वर ट्रम्पेट और ट्रम्पेट बैनर प्रदान किए

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने  राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति के अंगरक्षक (प्रेसीडेंट्स बॉडीगार्ड) को ‘नए अंगरक्षक मानक और नवीनीकृत रेजीमेंटल मानक’ प्रदान किए।
‘राष्ट्रपति के अंगरक्षक’ भारतीय सेना में सबसे पुरानी रेजीमेंट है जिसकी स्थापना 1773 में गर्वनर जनरल के अंगरक्षक (बाद में वायसराय के अंगरक्षक) के रूप में की गई थी। 27 जनवरी, 1950 को इसका नाम ‘राष्ट्रपति के अंगरक्षक’ किया गया।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के अनुसार रेजीमेंट को अंगरक्षक मानक और उनके रेजीमेंटल मानक 60 साल पहले 1963 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एस राधाकृष्णन द्वारा प्रदान किए गए थे।
इस अवसर पर अपने संक्षिप्त उद्बोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने रेजीमेंट के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रपति के अंगरक्षक के सभी अधिकारियों और जवानों को बधाई दी। उन्होंने उत्कृष्ट सैन्य परंपराओं और पेशेवर शैली के लिए रेजीमेंट की प्रशंसा की।
मुर्मू ने कहा कि वे भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अंगरक्षक होने का सम्मान उन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालता है। बयान के अनुसार राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि वे समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रपति भवन की सर्वश्रेष्ठ परंपराओं को कायम रखने के साहस के साथ काम करेंगे और भारतीय सेना की अन्य रेजीमेंट के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।

 

 

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