एआई महाकुंभ

Summary :

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट की शरूआत कर दी है। देश-विदेश की दिग्गज हस्तियां और अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्ष मंत्री और दिग्गज उद्योगपति इस में शामिल होंगे। यह समिट ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इटैंलिजेंस को अपना रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक एआई परिदृश्य की एक विश्वसनीय आवाज के तौर पर स्थापित करना है। एआई के क्षेत्र में अभी अमेरिका और चीन का दबदबा है। लगभग 90 प्रतिशत एआई पेटेंट अमेरिका, चीन और यूरोप से आते हैं। भारत अमेरिका और चीन के साथ कितनी तेजी…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट की शरूआत कर दी है। देश-विदेश की दिग्गज हस्तियां और अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्ष मंत्री और दिग्गज उद्योगपति इस में शामिल होंगे। यह समिट ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इटैंलिजेंस को अपना रही है। सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक एआई परिदृश्य की एक विश्वसनीय आवाज के तौर पर स्थापित करना है। एआई के क्षेत्र में अभी अमेरिका और चीन का दबदबा है। लगभग 90 प्रतिशत एआई पेटेंट अमेरिका, चीन और यूरोप से आते हैं।

भारत अमेरिका और चीन के साथ कितनी तेजी से इस क्षेत्र में दौड़ लगाएगा यह समिट इसकी रूपरेखा तैयार करेगा। गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, ओवन एआई के सैम आस्ट मैन, माइक्रो सौफ्ट के प्रेजीडेंट ब्रैड समिथ, जीप माईंड के डमिस, क्वालकाम के सीईओ क्रिस्टियानो अमीन और अन्य दिग्गज मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। ग्लोबल साउथ के पहले और सबसे बड़े इस सम्मेलन में एआई के वैश्विक प्रभावों जैसे रोजगार, परिदृश्य, सड़क सुरक्षा के लिए एआई के प्रयोग, सुरक्षित गतिशीलता, ड्राइवरों की ट्रेनिंग और जनहित के लिए प्रौद्योगिकी आधारित प्रभाव को समर्थन देने वाले एआई प्रयोगों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

अनुसंधान से समाधान तक जैसे विषय पर विशेष सत्र होंगे जिनमें इस बात की पड़ताल की जाएगी कि एआई किस प्रकार टिकाऊ, कुशल और जलवायु संवेदनशील कृषि को समर्थन दे सकता है। इसी तरह के विशेष सत्र पैरिस, बर्लिन, न्यूयार्क, जेनेवा, ओस्लो, बैंकाक और टोकियो में आयोजित किए जाएंगे। एआई को अपनाने के लिए व्यापक स्तर पर कौशल की जरूरत होगी। इसके लिए भी विस्तृत गाइडलाइन्स तैयार की जाएगी। भारत के पास ऐसी मजबूती है जो एआई के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ सकता है। एआई टूल्स के क्षेत्र में भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है जिन्हें तमाम कम्पनियां तेजी से अपना रही हैं।

एमेजॉन ने वर्ष 2030 तक 35 अरब डॉलर से अधिक निवेश का वादा किया है, माइक्रोसॉफ्ट ने चार साल में 17.5 अरब डॉलर और गूगल ने 15 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। यह अमेरिका से बाहर गूगल का सबसे बड़ा एआई और डेटा सेंटर हब होगा। भारत की डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना, कम लागत वाले डेटा और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के बाद नियामक स्थिरता ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। भारत की व्यापक रणनीति, सॉवरिन कंप्यूट और घरेलू लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स में निवेश के साथ, महंगे फ्रंटियर मॉडल विकास और क्षेत्रवार इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करने के बीच संतुलन बनाने का लक्ष्य रखती है।

इस संदर्भ में ताजा आर्थिक समीक्षा ने भी फ्रंटियर मॉडल विकास और एप्लीकेशन आधारित इस्तेमाल के बीच असमानता को रेखांकित किया है। यह उल्लेख करते हुए कि फ्रंटियर गैप को कम करने के प्रयास में ज्यादा खर्च आ सकता है। इसलिए या तो फ्रंटियर यानी अग्रणी स्तर के मॉडलों का अनुसरण किया जाए या सीमित संसाधनों को घरेलू प्राथमिकताओं के अनुरूप क्षेत्र विशिष्ट एआई प्रणालियों की ओर निर्देशित किया जाए। संरचनात्मक स्तंभों में 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) के माध्यम से कंप्यूट तक पहुंच का विस्तार, एआई कोश डेटासेट भंडार का निर्माण, एआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना और एआई इंसिडेंट का डेटाबेस बनाना शामिल हैं।

ये महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है लेकिन लागू की जा सकने वाली जवाबदेही, मजबूत डेटा शासन और स्पष्ट निवारण तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि प्रोत्साहन कंपनियों को अपारदर्शिता की ओर धकेलते हैं तो स्वैच्छिक अनुपालन पर्याप्त नहीं होगा। एआई के क्षेत्र में चुनौतियां कोई कम नहीं हैं। एआई कम्पनियों, उद्योगों यहां तक कि अदालतों में केसों के प्रबंधन, वर्चुअल अदालतों के जरिए मामलों के निपटान में तेजी लाने में सहायक हो सकता है लेकिन एआई का बढ़ता दुरुपयोग एक चुनौती बनकर सामने आया है। गोपनीयता, सुरक्षा, राष्ट्रीय और व्यक्तिगत और निष्पक्षता से संबंधित चिंताएं केन्द्र में हैं।

एआई का उपयोग करके डीप फेक, दुष्प्रचार और घातक हथियार विकसित करने का खतरा है जो मानव की सुर​क्षा के हित में नहीं होंगे। एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए विशाल डेटा की जरूरत होती है जिससे व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है। नैतिक और सामाजिक मुद्दों से छेड़छाड़ भी नुक्सानदेह हो सकती है। साइबर सुरक्षा आज के दौर में बहुत महत्वपूर्ण हो चुकी है। भारत जैसे देश में एआई के लिए वित्त पोषण भी कोई कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा।

आज एआई परिदृश्य में एक विरोधाभास सामने आ रहा है। जिसमें अत्याधुनिक माडल बहुत अधिक महंगे होने के साथ-साथ आम वस्तु बनते जा रहे हैं। सरकारों को बुनियादी ढांचे के बिल्कुल नए रूपों पर भी विचार करना चाहिए। जिस तरह वैश्विक दक्षिण ने हल्के, कम लागत वाले भौतिक बुनियादी ढांचे के रूपों का नेतृत्व किया। उदाहरण के लिए बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, उसी तरह बुनियादी एआई पर पुनर्विचार करने के अवसर भी मौजूद हैं। सामान्य प्रयोजन अनुवाद मॉड्यूल इसका एक उदाहरण हैं। भारत में भाषिनी और अफ्रीका में मसाखाने जैसी पहलें अंतिम-उपयोगकर्ता अनुप्रयोग नहीं हैं, बल्कि साझा परतें हैं जो पुनः प्रयोज्य भाषाई क्षमताएं प्रदान करती हैं।

अन्य विकल्पों में कम संसाधन वाली भाषाओं के लिए ओपन स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम, या मूल्यांकन बेंचमार्क शामिल हैं जो अधिक संदर्भ-संवेदनशील, स्थानीय रूप से संरेखित मॉडल को सुगम बनाते हैं। बुनियादी ढांचे में एआई निवेश का लाभ यह है कि इससे उच्च स्तर का लाभ मिलता है। यह कई तरह के नवाचारों को बढ़ावा देता है लेकिन ऐसे मामले भी हैं जहां विशिष्ट अनुप्रयोगों के लिए अधिक लक्षित सार्वजनिक वित्तपोषण अधिक उपयुक्त होता है। सरकारों को निजी क्षेत्र में एआई का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए रोड मैप तैयार करना होगा।

चुनौतियों के बावजूद इस समिट से उम्मीद है कि वैश्विक चर्चा के दौरान एआई के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने का समाधान मिलेगा। एआई दुनिया को नया आकार देने की क्षमता रखती है। ऐसे में यह सम्मेलन दिशा और मानकों को प्रभावित करने के लिए एक अच्छी पहल मानी जा सकती है।

Aditya Chopra

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.