अमेरिका के तेवर

Summary :

भारत और अमेरिका के संबंध इस समय सामान्य नहीं हैं। अमेरिका की भारत विरोधी नीतियों और बयानों से स्पष्ट हो जाता है कि दोनों देशों के रिश्तों में दूरियां पैदा हो चुकी हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अटकी पड़ी है और अमेरिका द्वारा रखी गई कड़ी शर्तों पर अब आगे बातचीत की सम्भावनाएं लगभग खत्म होती दिखाई दे रही हैं। रूस से तेल खरीद के मामले में भारतीय कम्पनियों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तलवार लटकाए हुए हैं। अमेरिका लगातार तीखे केवर अपना कर भारत को अपमानित कर रहा…

भारत और अमेरिका के संबंध इस समय सामान्य नहीं हैं। अमेरिका की भारत विरोधी नीतियों और बयानों से स्पष्ट हो जाता है कि दोनों देशों के रिश्तों में दूरियां पैदा हो चुकी हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अटकी पड़ी है और अमेरिका द्वारा रखी गई कड़ी शर्तों पर अब आगे बातचीत की सम्भावनाएं लगभग खत्म होती दिखाई दे रही हैं। रूस से तेल खरीद के मामले में भारतीय कम्पनियों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तलवार लटकाए हुए हैं। अमेरिका लगातार तीखे केवर अपना कर भारत को अपमानित कर रहा है। अमेरिका एच-1बी वीजा के खिलाफ बड़े एक्शन ले रहा है और इसी क्रम में अमेरिका ने भारतीय कम्पनियों को भी घेरा है। अमेरिका ने 8 कम्पनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से बाहर कर दिया है। इनमें इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल आदि बड़ी आईटी कम्पनियां शामिल हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा धारकों की तुलना बंधुआ मजदूरों से की। जेडी वेंस ने इन कम्पनियों पर अमेरिकी लोगों की नौकरियां छीनने का अरोप लगाते हुए कहा कि आऊट सो​िर्संग कम्पनियां बाहर से कर्मचारी बुलाकर उन्हें कम वेतन देकर उनसे बंधुआ मजूदरी करवाते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कुछ समय पहले भारत की तुलना ‘हेल होल’ नरक से की थी। फरवरी 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय नागरिकों को हथकड़ियां और बे​िड़यों में बांधकर भारत भेजा था। भारत सरकार ने समय-समय पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बंधुआ मजदूरी वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है ​तथा उसे याद दिलाया है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत ने यह भी कहा है कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, रिसर्च एवं रोजगार बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं। इससे दोनों देशों को फायदा होता है। अमेरिका में एच-1बी वीजा हासिल करने वालों में 71 प्रतिशत भारतीय हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रवासन को अपना चुुनावी मुद्दा बनाया था और अवैध रूप से रहने वाले लोगों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी पहले ही शुरू कर दी थी। सच्चाई तो यह है कि अमेरिका को प्रवासियों की भूमि कहा जाता है। दुनियाभर के लोग यहां आकर बसे हुए हैं। अमेरिका अप्रवासियों द्वारा निर्मित देश है। भारतीय मूल के 50 लाख से अधिक लोग अमेरिका में रहते हैं। अमेरिका की कई बड़ी कम्पनियों की कमान भारतीय मूल के लोगों के हाथ में है। हर क्षेत्र में भारतवंशियों ने अपनी सफलता का झंडा गाड़ा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में प्रवासियों का ही बड़ा योगदान है। अमेरिका आने वाले प्रवासी यहां की अर्थव्यवस्था पर बोझ नहीं हैं। यह तथ्य कई शोध संस्थाओं के अध्ययन में प्रमाणित भी हो चुका है। अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय प्रवासी यहां के मूल निवासियों सहित किसी भी जातीय समूह में सबसे अधिक उद्यमशील हैं। अमेरिका में परिवहन, आवास, स्वास्थ्य क्षेत्र और सेवा सत्कार क्षेत्र में एक-चौथाई कम्पनियां प्रवासियों की हैं। स्थिति यह है कि अमेरिका में श्रम शक्ति की वृद्धि पूरी तरह प्रवासियों आैर उनकी आगे की पीढ़ी पर निर्भर करती है। कुशल पेशेवरों का अमेरिका में जाकर काम करना दोनों देशों के लिए ही फायदेमंद है। भारतीय पेशेवर शोध, तकनीकी विकास, नए अविष्कार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं जिससे कम्पनियों का कारोबार बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। अमेरिका के एक्शन से जिन कम्पनियों पर यह फैसला लागू हुआ है वहां काम करने वाले पात्र कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन का एक और भारतीय विरोधी कदम सामने आया है। अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं का नाम काट दिया गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। अमेरिका में करीब 21 लाख भारतवंशी मतदाता हैं और 3 नवम्बर को वहां मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में ट्रम्प की पार्टी को हार का डर सता रहा है। इसकी एक वजह भारतीय मूल के वोटरों का रुझान है जो विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर जा रहा है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 65 प्रतिशत भारतीय मूल के लोगों ने डेमोक्रे​िटक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट दिया था। सर्वे बताते हैं कि ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है आैर 70 प्रतिशत अमेरिकी उनके कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं। ईरान से युद्ध, बढ़ती महंगाई से लोग परेशान हैं। यह भी कहा जा रहा है कि मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुक्सान हो सकता है। गिरगिट की तरह रंग बदलने में ट्रम्प माहिर तो हैं आैर उनका व्यवहार अप्रत्याशित है। दुनिया को रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंधों की धमकी देने वाले ट्रम्प अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे हैं। ट्रम्प ने डीजल सप्लाई को जरूरी बताया है आैर कहा है कि इससे अमेरिका में ईंधन की कीमतें नीचे आ सकती हैं। भारत को धमकाने वाले ट्रम्प अब किस मुंह से नसीहत देंगे यह देखना बाकी है।

Aditya Chopra

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.